भैरोपुर टिकरा खजुरहट निवासी सियाराम को सीने में संक्रमण होने पर टीबी एंड चेस्ट वार्ड में भर्ती किया गया है। उनके पुत्र मनोज कुमार ने बताया कि यहां पर जांच नहीं हुई तो बाहर से सीटी स्कैन व कुछ अन्य जांच कराना पड़ा। इसके लिए लगभग 6100 रुपये खर्च हुए।
केस दो : दौरे आने पर पहुंचे अस्पताल, 3200 में हुई जांच
गोसाईगंज के विशाल कुमार को दौरा आने पर परिजनों ने मेडिकल कॉलेज ट्रामा सेंटर पहुंचाया। यहां उन्हें रेड जोन में रखकर इलाज शुरू किया, लेकिन सीटी स्कैन नहीं हो सका तो ब्रह्म बाबा के पास स्थित एक निजी केंद्र भेजा गया। तीमारदार ने बताया कि वहां 3200 रुपये में जांच हुई।
अयोध्या। ये दो मामले तो उदाहरण के लिए पेश किए गए हैं। मेडिकल कॉलेज में जिम्मेदारों की नींद न खुलने से मरीज पिछले 25 दिन से या तो मोटी रकम चुकता करके बाहर से जांच करा रहे हैं या बेड पर पड़े कराह रहे हैं। अभी भी खराब पड़ी मशीन के सोमवार तक बनने का दावा किया जा रहा है।
मेडिकल कॉलेज दर्शन नगर में पीपीपी मोड पर एक सीटी स्कैन मशीन संचालित है। जबकि, मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन से एक अन्य मशीन भी लगभग चार-पांच माह पहले स्थापित की गई, लेकिन वह अब तक इंस्टॉल नहीं हो सकी है। पहली मशीन छह अप्रैल को अचानक खराब हो गई। इंजीनियरों ने एक महत्वपूर्ण पार्ट के खराब होने की जानकारी दी, लेकिन 25 दिन में भी सामान की व्यवस्था जिम्मेदार नहीं कर सके।
शनिवार को अमर उजाला ने अस्पताल परिसर का जायजा लिया तो बहुत से मरीज जांचों के लिए परेशान दिखे। ओपीडी में आने वाले मरीज तो किसी तरह बाहर से या जिला अस्पताल से जांच कराने गए, लेकिन सफर न कर पाने वाले गंभीर रोगी बेड पर ही पड़े कराहते रहे। उन्होंने व्यवस्था के प्रति आक्रोश भी जताया है।
लगभग 13 लाख रुपये का एक सामान मंगवाया जा रहा है। ऑर्डर कर दिया गया है। शीघ्र ही सामान मिलते ही मशीन दुरुस्त करवाया जाएगा। उम्मीद है कि सोमवार से जांच शुरू हो जाएगी। - डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज