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रामायण कालीन संस्कृति और स्थलों को सहेजने की आवश्यकता : चंपत

Sat, 19 Apr 2025 09:48 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
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अयोध्या। श्रीराम सांस्कृतिक शोध संस्थान न्यास दिल्ली का दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकर्ता सम्मेलन शनिवार को कारसेवक पुरम में शुरू हुआ। कार्यशाला में रामायण कालीन संस्कृति, विज्ञान और तीर्थ स्थलों के संरक्षण व संवर्धन पर विमर्श किया जा रहा है। मुख्य अतिथि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि रामायण कालीन संस्कृति और स्थलों को सहेजने की आवश्यकता है।
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चंपत राय ने भारत में श्रीराम वनगमन तीर्थों की पहचान, इनके संरक्षण और विकास में इन तीर्थों के शोधकर्ता डाॅ़ राम अवतार के योगदान को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि पिछले पांच दशक में डॉ़ राम अवतार ने भगवान राम की लीला भूमि पर गहन शोध करते हुए लगभग 300 स्थानों की पहचान की है जो अब धीरे-धीरे देश के धार्मिक पर्यटन मानचित्र में प्रमुखता से सम्मिलित होते जा रहे हैं।
श्रीराम सांस्कृतिक शोध संस्थान न्यास के संस्थापक और प्रबंध न्यासी भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के रामायण सर्किट के अध्यक्ष डॉ़ राम अवतार ने बताया कि सम्मेलन में पश्चिम बंगाल समेत भारत के विभिन्न राज्यों व नेपाल से भी करीब 150 कार्यकर्ता शामिल हैं। बताया कि हमने जहां-जहां श्रीराम पर शोध किया है, वहां से कार्यकर्ताओं को बुलाया है। उद्देश्य है कि हमारा संदेश लेकर कार्यकर्ता जन-जन तक जाएं और राम की संस्कृति, विज्ञान, उनसे जुड़े स्थलों के संरक्षण और संवर्धन के कार्य को विस्तार दें। इस दौरान पूर्व कुलपति प्रो. सुरेंद्र कुमार, ब्रिगेडियर राज बहादुर शर्मा, प्रो. रविंद्र कुमार सिंह, नदियों पर काम करने वाले पवन सिंह आदि मौजूद रहे।
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डॉ़ राम अवतार ने बताया कि यह कार्यकर्ता सम्मेलन राम मंदिर न्यास की ओर से अयोध्या में बनाए जा रहे भव्य अंतरराष्ट्रीय श्रीराम कथा संग्रहालय के विविध पक्षों पर गहन विचार-विमर्श के लिए हो रहा है। दो दिवसीय सम्मेलन में प्रतिदिन तीन सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। जिसमें प्रत्येक सत्र में चार विद्वान अपने-अपने विषय पर वाल्मीकि रामायण और श्रीराम चरित मानस सहित अन्य रामायण के आधार पर शोध पत्र रखेंगे। जिनके आधार पर संग्रहालय में संबंधित विषय प्रदर्शित किए जाएंगे।
शनिवार को आयोजित सत्रों में संग्रहालय के भवन निर्माण और वास्तु शिल्प पर प्रख्यात आर्किटेक्ट राकेश वत्स, रामायण कालीन अभियांत्रिकी पर इंदौर से आए वरिष्ठ अभियंता श्रीनिवास कुटुंबले, रामायण कालीन विमान शास्त्र और पुष्पक विमान विषय पर भारतीय वायुसेना के अवकाश प्राप्त अधिकारी विजय प्रसाद उपाध्याय ने शोध पत्र प्रस्तुत किया। इसके अलावा रामायण कालीन उपचार विषय पर योगाचार्य राजेश कुमार और रामायण कालीन हथियार विषय पर दिल्ली से आए ब्रिगेडियर राज बहादुर शर्मा ने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
बैठक में पश्चिम बंगाल के हालात पर भी चिंता व्यक्त की गई। डॉ. राम अवतार ने कहा कि वहां पर राज्य की ओर से आयोजित हिंसा चल रही है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि जिस तरह के हालात वहां हैं, पुलिस कुछ नहीं कर रही है। बंगाल में शासन नाम की कोई चीज नहीं है। हिंदुओं को पश्चिम बंगाल में जान बूझकर प्रताड़ित और भयभीत करने का काम किया जा रहा है। बंगाल की परिस्थिति बेहद चिंताजनक है।
सम्मेलन में श्रीराम वनगमन मार्ग पर चिह्नित 292 महत्वपूर्ण स्थानों पर श्रीराम स्तंभ प्रतिष्ठित करने और इस संबंध में विस्तृत विवरण समेत एक काफी टेबल बुक तैयार करने का निर्णय हुआ। श्रीराम स्तंभ का आधार भगवान श्री राम की ओर से भारत से नेपाल और श्रीलंका तक की पांच हजार किलोमीटर की अखंड भारत की पदयात्रा है। उक्त मार्ग पर 292 महत्वपूर्ण स्थान चिह्नित किए गए हैं जहां श्री राम स्तंभ प्रतिष्ठित किया जाना है। विश्व हिंदू परिषद, अशोक सिंहल फाउंडेशन और श्रीराम सांस्कृतिक शोध संस्थान न्यास की पहल पर तैयार कराए गए श्री राम स्तंभ की लंबाई 15 फीट, मध्य की चौड़ाई ढाई फिट और आधार पांच फिट का है।
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