अयोध्या। रामजन्मभूमि से सटे प्राचीन रंगमहल में झूलनोत्सव की अनुपम छटा बिखर रही है। रंग महल में पूरे एक माह तक रंगमहल सरकार झूले पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देते हैं। इस बीच रंगमहल सरकार की सेवा भी बढ़ गई है, उन्हें देर रात तक जगाया जा रहा है। चार पुजारी 18 घंटे तक उनकी सेवा कर रहे हैं।
रंगमहल में राम सहित चारों भाई झूला विहार करते हैं। चारों भाईयों के लिए अलग-अलग झूला सजाया जाता है। यहीं नहीं राम समेत चारों भाईयों की पत्नियों के विग्रह को भी झूला पर स्थापित कर झुलाया जाता है। राम-सीता, भरत-मांडवी, लक्ष्मण-उर्मिला, शत्रहुन-श्रुतिकीर्ति को चांदी के झूलन पर विराजमान किया जाता है।
झूला महोत्सव के कारण भगवान का शयन झूलनोत्सव के बाद रात लगभग 12 बजे हो पा रहा है। चूंकि भगवान राम और सीता जी बेहद सुकुमार हैं, इसलिए उन्हें सुबह छह बजे आरती कर जगाया जा रहा है। जबकि भगवान को पहले चार बजे जगाया जाता था।
सुबह नौ बजे तक स्नान, वस्त्र पहनाने, अल्पाहार के बाद भगवान की श्रृंगार आरती होती है। दोपहर 12:30 बजे भोग और आरती के बाद मंदिर का पट बंद हो जाता है। शाम चार बजे आरती और अल्पाहार के बाद भगवान का पट दर्शन के लिए खुल जाता है। शाम सात बजे आरती के बाद झूलनोत्सव की छटा बिखरने लगती है। स्थापित संगीतज्ञ भगवान को झूला के पद सुनाते हैं। झूलनोत्सव के आनंद में भक्त व श्रद्धालु भी मुग्ध हो उठते हैं।