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Ayodhya News: सपनों की उड़ान पर सिस्टम की बेड़ी

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अयोध्या। ग्रामीण क्षेत्र की स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के अपने पैरों पर खड़े होकर आर्थिक रूप से स्ववालंबी बनने के सपनों की उड़ान पर फाइलों की बेड़ी पड़ गई है। यह महिलाएं यूपीनेडा योजना के तहत पिछले पांच महीने से ई रिक्शा मिलने का इंतजार कर रही हैं। इसके लिए उन्होंने ब्याज पर 50-50 हजार रुपये का कर्ज लेकर एफडी भी जमा की है। आठ चयनित लाभार्थियों ने तो काफी दौड़भाग करने के बाद थक हार कर अपना आवेदन ही वापस ले लिया है।
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यूपीनेडा के निदेशक की ओर से अयोध्या के पंचकोसी और 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के साथ राम मंदिर मार्ग पर प्रदूषण मुक्त ई रिक्शा संचालन के लिए वर्ष 2024 में योजना प्रस्तावित की गई। इसमें प्रथम चरण में 20 महिलाओं को चयनित किए जाने की तैयारी थी। इसके पीछे मकसद था कि अयोध्या आने वाली महिला श्रद्धालुओं को महिला ई रिक्शा चालकों की ओर से ही सुगम यातायात की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। शुरुआत में इस योजना के लिए महिला चालकों की ओर से आवेदन ही नहीं आए।

इसके बाद काफी प्रयास कर स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 14 महिलाओं से योजना के तहत ई रिक्शा प्रदान करने के लिए आवेदन करवाया गया। इन महिलाओं ने आवेदन के साथ सभी औपचारिकताएं पूरी की। समूह से ही ब्याज पर कर्ज लेकर 50-50 हजार रुपये की एफडी भी दी। पहले लर्निंग और फिर स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस हासिल किया। इसके बाद भी यूपीनेडा के स्थानीय अफसर व कर्मचारियों की ओर से इन्हें दौड़ाया जाता रहा। इससे आजिज आकर आठ महिलाओं ने तो आवेदन ही वापस ले लिया।
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वहीं मसौधा ब्लॉक के टोनिया गांव की निवासी सीमा, सुमन, बभनगांवा की सान्या, बिरौली की मीरा व रीता और महावां की तारा ने हार नहीं मानी। सरकारी सिस्टम के किसी भी नई शुरुआत में अवरोध डालने वाली व्यवस्था से इनकी लड़ाई जारी है। यह अलग बात है कि ई रिक्शा पाने की जद़्दोजहद में लगातार की जा रही भागदौड़ के चलते इन्हें आर्थिक नुकसान उठाने के साथ परिवार के सदस्यों की खरी-खोटी भी सुननी पड़ रही है। इन महिलाओं का कहना है कि तमाम प्रयासों के बाद भी यूपीनेडा के दफ्तर में स्वीकृति की फाइल आगे नहीं बढ़ रही है। यदि जल्द ई रिक्शा नहीं मिला तो वे भी अपने आवेदन वापस ले लेंगी।
यूपीनेडा के परियोजना प्रबंधक पीएन पांडेय ने बताया कि महिलाओं को ई रिक्शा उपलब्ध कराने के लिए ई ऑफिस प्रणाली के माध्यम से फाइल मुख्य विकास अधिकारी को भेज दी गई है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका के माध्यम से इन महिलाओं की ओर से जो एफडी जमा की गई थी, उसमें कुछ तकनीकी त्रुटि थी। इसे भी ठीक करा लिया गया है। सीडीओ से स्वीकृति मिलने के बाद जल्द ही ई रिक्शा उपलब्ध करवा दिया जाएगा।
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