अयोध्या। रामजन्मभूमि परिसर में रामलला के मुख्य गर्भगृह समेत पूरे मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने पर मंथन किया जा रहा है। सुरक्षा व्यवस्था को तकनीकी रूप से उन्नत बनाने के लिए एआई आधारित सुरक्षा उपकरणों के इस्तेमाल पर भी विचार हो रहा है। बुधवार को श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र परिसर स्थित यात्री सुविधा केंद्र के सभागार में स्थायी सुरक्षा समिति की त्रैमासिक समीक्षा बैठक हुई। इसमें वरिष्ठ सुरक्षा एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने मौजूदा इंतजामों की समीक्षा की।
बैठक में सुरक्षा घेरे को अधिक प्रभावी बनाने, सतर्कता बढ़ाने और सुधार की जरूरत वाले बिंदुओं को चिह्नित कर उन्हें दूर करने पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था को लगातार अद्यतन रखने, निगरानी तंत्र मजबूत करने और आवश्यकतानुसार आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने के सुझाव दिए। रामलला के मुख्य गर्भगृह की सुरक्षा को विशेष महत्व देते हुए इंतजाम और प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।
बैठक की अध्यक्षता श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव स्वामी गोविंददेव गिरि ने की। वह कोलकाता से ऑनलाइन जुड़े। बैठक में पुलिस महानिदेशक सुरक्षा अमरेंद्र कुमार सेंगर, एडीजी जोन प्रवीण कुमार, आईबी की अपर महानिदेशक विनीता शर्मा और सीआरपीएफ के उपमहानिरीक्षक विनय नेगी ने सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए सुझाव दिए। ट्रस्ट के मुख्य कार्यपालक अधिकारी एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र (सेवानिवृत्त), सचिव जगदीश आफले और पुलिस अधीक्षक सुरक्षा विजय शंकर मिश्रा भी मौजूद रहे। मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक समेत अन्य संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों ने भी सहभागिता की।
पर्वों के मद्देनजर सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा
एडीजी जोन प्रवीण कुमार ने बताया कि रामजन्मभूमि परिसर की सुरक्षा संबंधी बैठक नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है। आगामी पर्वों के मद्देनजर सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाने के लिए आवश्यकतानुसार आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का विश्वास अर्जित करने और उनका सहयोग सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। मीडिया कवरेज के लिए भी दिशा-निर्देश तैयार किए गए हैं, जिन्हें विस्तार से जारी किया जाएगा।
दीपोत्सव से कार्तिक पूर्णिमा तक सुरक्षा की चुनौती
सात नवंबर को होने वाले 10वें दीपोत्सव के साथ कार्तिक मास के प्रमुख धार्मिक आयोजनों को सकुशल संपन्न कराना पुलिस-प्रशासन की प्राथमिकता है। इस अवधि में 14 कोसी और पंचकोसी परिक्रमा के साथ कार्तिक पूर्णिमा स्नान में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही से जुड़ी तैयारियों की समीक्षा की जा रही है।