02- रामायण बेला में संचालित प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में निकली शोभायात्रा- संगठन
अयोध्या। श्रीरामायण बेला में संचालित प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के क्रम में बुधवार को वैदिक अनुष्ठानों की भव्य शृंखला संपन्न हुई। इससे पहले मंदिर परिसर से सरयू तट तक भव्य शोभायात्रा निकाली गई।
कार्यक्रम का आरंभ भगवान और आचार्य की आज्ञा से हुआ। इसके बाद श्रीविश्वकसेन पूजन, पुण्याहवाचन, मृद संग्रह और अंकुरारोपण जैसे वैदिक संस्कार विधिपूर्वक संपन्न किए गए। समस्त अनुष्ठान दक्षिण भारत से पधारे आचार्य वेंकटेश भट्टर स्वामी के आचार्यत्व में पाञ्चरात्रागम विधि से संपन्न हो रहे हैं। मंदिर में 27 फरवरी को भगवान की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी।
इसी क्रम में आयोजित वाल्मीकि रामायण कथा में जगद्गुरु रत्नेश प्रपन्नाचार्य ने वाल्मीकि रामायण के माध्यम से भक्ति के मर्म को स्पष्ट किया। कहा कि भक्ति को पाने के लिए सरलता ही सबसे महत्वपूर्ण गुण है। भगवान श्रीराम ने अपने आदर्श चरित्र से यह सिद्ध किया कि वे स्वयं अत्यंत सरल और सहज हैं। इसी सरलता के मार्ग से उन्होंने सीता रूपी भक्तिदेवी को प्राप्त किया और अपने भक्तों से भी उसी निष्कपट भाव की अपेक्षा रखते हैं।