अयोध्या। रामजन्मोत्सव पर रामलला के सूर्य तिलक की तैयारी शुरू हो गई है। रुड़की के वैज्ञानिकों की टीम ने अयोध्या में डेरा डाल दिया है। इसी क्रम में शनिवार को वैज्ञानिकों ने सूर्य तिलक का ट्रायल किया। मंदिर के शिखर से पाइप के सहारे किरणों को गर्भगृह तक लाया गया, जिसने रामलला के मस्तक को सुशोभित किया। करीब एक मिनट का यह ट्रायल सफलतापूर्वक हुआ। अब रामजन्मोत्सव यानी छह अप्रैल को दोपहर ठीक 12 बजे रामलला का सूर्य तिलक होगा।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि पिछले वर्ष रामलला के सूर्य तिलक का प्रयोग हुआ था। इस बार पर राम जन्मोत्सव पर रामलला का सूर्य तिलक होगा। वैज्ञानिक इस काम में लगे हैं। राम जन्मोत्सव पर चार मिनट तक रामलला का सूर्य तिलक होगा। उन्होंने कहा कि इस समय 70 से 80 हजार श्रद्धालु आ रहे हैं। रामनवमी में यह संख्या कई गुना बढ़ सकती है। अयोध्या में सब जगह शेड व कारपेट की व्यवस्था संभव नहीं है। इसलिए अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं से अपील है कि गर्मी से रक्षा करने के साधन अपने साथ जरूर लाएं। सिर को धूप से बचाने के लिए गमछा, तौलिया व टोपी का इस्तेमाल करें। लू व गर्म हवाओं से डायरिया हो सकता है। इसलिए पानी का बोतल अपने साथ अवश्य रखें। अपने झोले में सत्तू रखें। ओआरएस का घोल भी इस्तेमाल करें।
रामलला के दरबार में चैत्र नवरात्रि पर अनुष्ठान शुरू हो गया है। चांदी की चौकी पर कलश स्थापना की गई है। चंपत राय ने बताया कि रोजाना सुबह तीन घंटे व शाम को तीन घंटे वाल्मीकि रामायण का पाठ हो रहा है। इसके अलावा रामचरित मानस का नवाह पारायण हो रहा है। आठ दिनों में एक लाख मंत्रों से आहुति भी दी जाएगी। चैत्र नवरात्र के प्रथम दिन रामलला को बधाई भी सुनाई गई। गायकों ने बधाई व सोहर गान किया। यह सिलसिला नौ दिनों तक चलेगा।