फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ayodhya News: यज्ञ कुंड में आहुतियां अर्पित करने का क्रम शुरू

Fri, 13 Mar 2026 09:48 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
विज्ञापन
विज्ञापन
अयोध्या। राम मंदिर अयोध्या में श्रीराम यंत्र स्थापना को लेकर चल रहा वैदिक अनुष्ठान दूसरे दिन भी विधि-विधान के साथ जारी रहा। सुबह से ही वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंडप प्रवेश, वास्तु पूजन सहित विभिन्न देव शक्तियों का आह्वान किया गया। शुक्रवार से यज्ञ कुंड में आहुतियाँ अर्पित करने का क्रम शुरू हो गया है।
विज्ञापन

अनुष्ठान के दूसरे दिन सबसे पहले मंडप प्रवेश की प्रक्रिया संपन्न कराई गई। इसके बाद यज्ञमंडप और परिसर की शुद्धि के लिए विधिवत वास्तु पूजन किया गया। वैदिक परंपरा के अनुसार योगिनी पूजन, क्षेत्रपाल पूजन और प्रधान पूजन संपन्न हुआ, जिससे यज्ञमंडप में स्थापित सभी वेदियों और दिशाओं की देव शक्तियों का आह्वान किया गया। आचार्यों ने वैदिक विधि से सभी वेदियों का आह्वान कर उन्हें यज्ञ के लिए प्रतिष्ठित किया। इसके पश्चात अरणि मंथन की विशेष प्रक्रिया के माध्यम से यज्ञमंडप में अग्नि प्रकट की गई। वैदिक मान्यता के अनुसार यह अग्नि देवताओं को आह्वान करने और यज्ञ की पवित्रता का प्रमुख आधार मानी जाती है।


अग्नि प्रकट होने के बाद नवग्रहों का विधिवत पूजन किया गया, ताकि अनुष्ठान में ग्रहों की अनुकूलता बनी रहे। इसके बाद वैदिक ऋचाओं के साथ पुरुष सूक्त के मंत्रों से हवन संपन्न कराया गया। पुरुष सूक्त से श्रीराम के लिए व श्रीसूक्त से माता सीता के लिए मंत्रों का जाप कर हवन किया गया। इस अनुष्ठान को श्रीसीताराम महायज्ञ का नाम दिया गया है। अनुष्ठान कराने वाले प्रमुख आचार्यों में आचार्य चंद्रभानु शर्मा, आचार्य पंकज कौशिक, आचार्य इंद्रदेव मिश्र, आचार्य प्रवीण शर्मा और आचार्य सतीश वैदिक शामिल हैं।
विज्ञापन


रोजाना सात घंटे हो रहा अनुष्ठान
अनुष्ठान प्रतिदिन दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है। पहला सत्र सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक तथा दूसरा सत्र दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक चलता है। पूरे अनुष्ठान में दिल्ली, वाराणसी, अयोध्या व दक्षिण भारत से 51 से अधिक विद्वान आचार्य वैदिक विधि से यज्ञ और पूजन संपन्न करा रहे हैं। इस अनुष्ठान के मुख्य यजमान डॉ. अनिल मिश्र हैं, जिनके संकल्प के साथ श्रीराम यंत्र स्थापना की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। आचार्यों के अनुसार यह अनुष्ठान श्रीराम मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा और दिव्यता को और अधिक सशक्त बनाने का महत्वपूर्ण वैदिक आयोजन माना जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें