अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय ने मौखिकी और प्रायोगिक परीक्षाओं के लिए पुरानी व्यवस्था फिर से बहाल कर दी है। इसमें महाविद्यालयों के प्राचार्यों के अनुमोदन पर आंतरिक और विश्वविद्यालय की ओर से वाह्य परीक्षक नियुक्त किए जाते थे। वर्ष 2021 से इस व्यवस्था को बंद कर नए प्रावधान के तहत महाविद्यालयों को आंतरिक और वाह्य परीक्षक दोनों नियुक्त करने की स्वायत्तता दे दी गई थी।
वर्ष 2021 से प्रभावी नए प्रावधान के परिणाम स्वरूप कॉलेजों के प्रबंधकों और प्राचार्यों की मनमानी की शिकायतें आम हो गई थीं। अवध विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक संघ पुरानी व्यवस्था की बहाली के पक्ष में लगातार प्रयास कर रहा था। शिक्षक संघ ने राज्यपाल व कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल के अपर मुख्य सचिव डॉ. सुधीर एम बोबड़े और ओएसडी डॉ. पंकज एल जानी से मिलकर इसकी शिकायत भी की थी। इस पर उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को दिशा-निर्देश दिए थे।
शिक्षक संघ ने इस पर कई दौर की वार्ता कुलपति प्रो. प्रतिभा गोयल से की थी। इसके बाद नए कार्यवाहक कुलपति डॉ. बृजेंद्र सिंह को शिक्षक संघ पदाधिकारियों ने सारे घटनाक्रम से अवगत कराया। इस पर प्रभारी कुलपति ने तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को बुलाकर विद्यार्थी और शिक्षकों के हित में इस संबंध में आदेश जारी किया। शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. जनमेजय तिवारी, महामंत्री प्रो. अमूल्य कुमार सिंह और स्ववित्त पोषित शिक्षक संघ ने प्रभारी कुलपति से मिलकर इसके लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। साथ ही प्रभारी कुलसचिव प्रो. एसएस मिश्र व प्रभारी परीक्षा नियंत्रक प्रो. सिद्धार्थ शुक्ल का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे विश्वविद्यालय के हर सुधारात्मक निर्णय के साथ हैं।
शिक्षक संघ के प्रयास से मिली इस सफलता पर पर शिक्षक संघ भवन पर पहुंचकर शिक्षकों ने अध्यक्ष और महामंत्री को मिठाई खिलाकर खुशी जाहिर की और बधाई दी। डॉ. प्रशांत प्रजापति, डॉ. आलोक सिंह, डॉ. वेद मणि, डॉ. उमाकांत यादव, डॉ. अखिलेश्वर, डॉ. ऋषिकेश मिश्र, डॉ. घनश्याम यादव, डॉ. मनीष माथुर, डॉ. हीरा लाल, डॉ. विनोद यादव, डॉ. आशुतोष पांडेय, डॉ. राकेश यादव व डॉ सोनू समेत अन्य शिक्षकों ने संघ भवन पर अध्यक्ष व महामंत्री को धन्यवाद ज्ञापित किया।