अयोध्या। जिला अस्पताल में करीब आठ साल से लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की मशीन धूल फांक रही है। मरीजों के लिए बेहद उपयोगी व कीमती मशीन ओटी में रखे-रखे ही खराब हो गई। अब वह मरम्मत योग्य भी नहीं बची है। जिम्मेदारों की लापरवाही से धन की बर्बादी तो हुई ही, मरीजों को भी दूरबीन विधि से ऑपरेशन का लाभ नहीं मिल सका। तमाम समस्याएं झेलते हुए मरीज ओपन सर्जरी करा रहे हैं।
जिला अस्पताल के सर्जरी विभाग में हार्निया, पथरी, गर्भाशय समेत अन्य कई ऑपरेशन चीरा विधि से होते थे, जबकि लेप्रोस्कोपिक सर्जरी (दूरबीन शल्य चिकित्सा पद्धति) को ज्यादा सुरक्षित और दर्द रहित माना जाता है। इस विधि से ऑपरेशन करने पर मरीज को परेशानी भी कम होती है। वह 24 से 72 घंटे में ही चलने-फिरने की स्थिति में आ जाता है। यहां के मरीजों को भी सहूलियत देने के मकसद से एक दशक पूर्व लेप्रोस्कोपी सर्जरी के लिए आधुनिक मशीन उपलब्ध कराई गई थी।
सूत्रों के अनुसार शुरुआती दौर में इस मशीन का लाभ मरीजों को मिला। उस समय तैनात जनरल सर्जन दूरबीन विधि से ऑपरेशन करने लगे। कुछ ही समय बाद सर्जन का तबादला हुआ तो मशीन भी बंद हो गई। दूसरे सर्जन की तैनाती तो हुई, लेकिन वह ओपन सर्जरी ही करने लगे। काफी समय तक उपयोग न होने से मशीन खराब हो गई और मौजूदा समय में उपयोग के लायक ही नहीं बची है। पूर्व सीएमएस डॉ. एनपी गुप्ता ने इसकी मरम्मत कराने का प्रयास भी किया, लेकिन असफल रहे।
मिल जाए मशीन तो हो सकेंगे ये ऑपरेशन
लेप्रोस्कोपिक मशीन से एपेंडिक्स, गाल ब्लाडर में पथरी, हार्निया, गर्भाशय से संबंधित ऑपरेशन, ओवेरियन ट्यूमर, किडनी सहित अन्य ऑपरेशन आसानी से संभव हैं। इसमें किसी तरह के संक्रमण का खतरा भी नहीं होता है।
शीघ्र ही कार्यभार ग्रहण किया है। मामला पुराना होने के कारण पूरी जानकारी नहीं है। जनरल सर्जरी विभाग के चिकित्सक व अस्पताल के अन्य कर्मचारियों से जानकारी लेकर कार्यवाही की जाएगी। -डॉ. उत्तम कुमार, प्रमुख अधीक्षक, जिला अस्पताल