27- नागेश्वरनाथ मंदिर में स्थापित शिवलिंग
अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में भगवान शिव की उपासना की परंपरा भी उतनी ही प्राचीन है। रामलला के दर्शन के साथ श्रद्धालु यहां स्थित प्राचीन शिवालयों में जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करते हैं। इन शिव मंदिरों की ऐतिहासिक और पौराणिक महत्ता की पुष्टि वर्ष 1902 में तत्कालीन ब्रिटिश प्रशासन की ओर से स्थापित एडवर्ड तीर्थ विवेचनी सभा के शिलालेखों से भी होती है।
अयोध्या के इतिहास पर शोध करने वाले डॉ. हरिप्रसाद दुबे के अनुसार, एडवर्ड तीर्थ विवेचनी सभा ने प्रमाणिक ऐतिहासिक अध्ययन के आधार पर रामनगरी की 84 कोसी परिक्रमा क्षेत्र में 148 शिलालेख स्थापित कराए थे। इन शिलालेखों में अयोध्या के प्रमुख धार्मिक और पौराणिक स्थलों का विवरण दर्ज है। इनमें कई प्राचीन शिवालयों का भी उल्लेख मिलता है।
शिलालेखों में 15वें क्रमांक पर क्षीरेश्वरनाथ, 27वें पर दुर्गेश्वरनाथ, 81वें पर नागेश्वरनाथ, 92वें पर मंत्रेश्वर महादेव, 100वें पर विघ्नेश्वर, 110वें पर त्रिपुरारी मंदिर और 117वें क्रमांक पर दुग्धेश्वर महादेव का उल्लेख है। ये अभिलेख अयोध्या में शिव आराधना की प्राचीन परंपरा और धार्मिक महत्व को प्रमाणित करते हैं।
सावन में शिवालयों में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़
नागेश्वरनाथ और क्षीरेश्वरनाथ मंदिर अयोध्या के प्रमुख शिवधामों में शामिल हैं। मान्यता है कि नागेश्वरनाथ मंदिर की स्थापना भगवान श्रीराम के पुत्र महाराज कुश ने कराई थी, जबकि रामजन्मभूमि के ईशान कोण स्थित क्षीरेश्वरनाथ महादेव मंदिर की स्थापना महाराज दशरथ से जुड़ी मानी जाती है।
इन दोनों शिवालयों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। सावन माह में यहां भक्तों की संख्या और बढ़ जाती है तथा पूरा रामनगरी क्षेत्र शिवभक्ति में रंग जाता है।