अयोध्या। राम मंदिर की स्वर्णिम निर्माण यात्रा का पाठ इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्रदान करने वाले भारत के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी के छात्र-छात्राओं को पढ़ाया जाएगा। इसके लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र और राम मंदिर के भवन का निर्माण करने वाले लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) के सहयोग से पुस्तक लिखी जाएगी।
एलएंडटी के चेयरमैन एसएन सुब्रमण्यन के इस प्रस्ताव पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की ओर से महासचिव चंपत राय ने सहमति दे दी है। इस बारे में महासचिव राय ने रविवार को यहां रीडगंज स्थित कोहिनूर पैलेस में आयोजित फैजाबाद पुस्तक मेला के उद्घाटन समारोह में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एलएंडटी के चेयरमैन एक दिन पहले अयोध्या आए थे। इस दौरान उन्होंने श्रीरामजन्मभूमि परिसर का भ्रमण कर पूरे हो चुके और अंतिम दौर में चल रहे निर्माण कार्यों को बारीकी से देखा।
इसी कड़ी में बातचीत के दौरान उन्होंने तीर्थ क्षेत्र के महासचिव के समक्ष राम मंदिर की निर्माण यात्रा पर आईआईटी के विद्यार्थियों के लिए पुस्तक लिखे जाने का प्रस्ताव रखा। ट्रस्ट की ओर से तैयार करवाई जाने वाली पुस्तक के लिए उपयोगी सामग्री उपलब्ध कराने में एलएंडटी भी सहयोग प्रदान करेगा। राय ने कहा कि पिछले एक हजार साल में देश में राम मंदिर जितना बड़ा स्टोन स्ट्रक्चर नहीं बनवाया गया है।
महासचिव के अनुसार यमुना नदी के किनारे दिल्ली में लाल किला कैसे बना और आगरा में ताजमहल की नींव कैसे पड़ी, इस बारे में कोई नहीं जानता है। ऐसे ही सरयू नदी के किनारे इतना भव्य राम मंदिर कैसे बना, 50 साल बाद कोई कैसे जान पाएगा। इसीलिए इस पर पुस्तक लिखने का विचार एलएंडटी के चेयरमैन के मन में आया है। तीर्थ क्षेत्र ने उनके विचार का सम्मान करते हुए इस पर अपनी सहमति दे दी है।
राम मंदिर के निर्माण पर लिखी जाने वाली पुस्तक के लिए एलएंडटी मंदिर के निर्माण में जुटे तकनीकी विशेषज्ञों की ओर से लिखे गए अधिकृत बिंदु उपलब्ध कराएगी। यह सामग्री 15 से 20 छोटी पुस्तकों के रूप में भी हो सकती है। अंतिम रूप से पुस्तक के तैयार होने के बाद उसे आईआईटी को प्रदान किया जाएगा ताकि भविष्य के इंजीनियर इसे पढ़कर कुछ नया सीख सकें।