अयोध्या। जैन मंदिर रायगंज में रविवार को 20वें तीर्थंकर मुनि सुब्रतनाथ का जन्मकल्याणक मनाया गया। मंगल ध्वनि के साथ शोभायात्रा निकली। शोभायात्रा आकर्षण का केंद्र रही। ऐरावत हाथी ने उत्सव को दिव्य बनाया। श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा की, भक्ति नगर में बही।
जैन मंदिर के पीठाधीश रवींद्रकीर्ति स्वामी के सानिध्य में पांडुकशिला पर भगवान मुनि सुब्रतनाथ का विधिवत जन्माभिषेक संपन्न हुआ। मंत्रोच्चार, कलशों की धार और श्रद्धा से भीगे भावों के बीच यह दृश्य उपस्थित जनसमूह के लिए अविस्मरणीय बन गया। पूजन मंडल विधान भी श्रद्धापूर्वक संपन्न कराया गया। धार्मिक अनुष्ठान में सिद्धार्थ जैन, दीप्ति जैन, अर्पण जैन, समर्थ जैन और अध्यात्म जैन ने सहभागिता निभाई। प्रतिष्ठाचार्य विजय कुमार जैन के निर्देशन में समस्त पूजन-विधान संपन्न हुआ।
गणिनी प्रमुख ज्ञानमती ने संदेश में कहा कि जैन तीर्थंकरों ने सदैव समूचे देश को भाईचारे, करुणा और सहअस्तित्व का मार्ग दिखाया है। भगवान मुनि सुब्रतनाथ का जीवन भी मानवता को जोड़ने और समरस समाज बनाने की प्रेरणा देता है। भगवान मुनि सुब्रतनाथ का जन्मकल्याणक हमें स्मरण कराता है कि धर्म का सच्चा स्वरूप प्रेम, संयम और परस्पर सम्मान में बसता है। इस अवसर पर डॉ. जीवन प्रकाश जैन, मनोज जैन, सुरेंद्र जैन, ऋषभदेव, आदेश जैन सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।
आकार ले रहा भगवान सुब्रतनाथ का भव्य मंदिर
- रवींद्रकीर्ति स्वामी ने अपने संदेश में कहा कि अयोध्या केवल एक नगर नहीं, बल्कि भारतीय आत्मा का तीर्थ है। यहां से निकला हर संदेश राष्ट्र को जोड़ने वाला होता है। बताया कि जैन परंपरा के अनुसार, भगवान मुनि सुब्रतनाथ के तीर्थकाल में ही अयोध्या में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का जन्म हुआ था। यही कारण है कि अयोध्या की यह भूमि दोनों परंपराओं की साझा आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक मानी जाती है। इसी स्मृति को साकार करने के लिए भगवान ऋषभदेव मंदिर परिसर में भगवान मुनि सुब्रतनाथ का भव्य मंदिर भी आकार ले रहा है।