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Ayodhya News: मारपीट करने के मामले में फिर से होगी सुनवाई

Mon, 25 May 2026 09:50 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
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अयोध्या। जमीन पर कब्जा करने के दौरान मारपीट करने के मामले में अवर न्यायालय के आदेश को निरस्त करते हुए मामले में फिर से सुनवाई करने का आदेश जिला जज ने पारित किया है।
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जनपद न्यायाधीश के अदालत में प्रस्तुत प्रार्थना के अनुसार राम तीरथ, पिंकी, शुभी, पुनीता, बैजनाथ, सरोज कुमारी ने कंचन की आबादी की भूमि पर जबरन कब्जा करने का प्रयास किया। 12 अक्तूबर 2025 को दोपहर में इसी रंजिश को लेकर कंचन देवी व उसके परिवार वालों के साथ लाठी डंडे से मारकर गंभीर रूप से चोट पहुंचाई गई। कंचन देवी की कहीं सुनवाई नहीं हुई बल्कि उनके परिवार के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज करा दी गई।

कंचन देवी ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में मामले की रिपोर्ट दर्ज कराए जाने के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। सीजेएम ने 29 नवंबर को कंचन देवी का प्रार्थना पत्र आधार हीन होने के कारण निरस्त कर दिया। इसके बाद उन्होंने जनपद न्यायाधीश रणंजय कुमार वर्मा की अदालत में रिवीजन प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। जनपद न्यायाधीश ने अवर न्यायालय के आदेश को निरस्त कर दिया। साथ ही पत्रावली पर मौजूद तथ्यों का सम्यक रूप से परिशीलन करने के बाद दोबारा सुनवाई करने का आदेश पारित किया।
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भ्रष्टाचार के मामले में आरोपी को मिली जमानत

अयोध्या। भ्रष्टाचार के मामले में आरोपी रमाकांत को अदालत से जमानत मिल गई है। यह आदेश विशेष न्यायाधीश एंटी करप्शन कोर्ट के न्यायाधीश रजत वर्मा ने उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में पारित किया है।
आरोपी रमाकांत चौबे ने विशेष न्यायाधीश एंटी करप्शन कोर्ट के समक्ष उच्च न्यायालय की ओर से पारित जमानत आदेश के क्रम में जमानत धनराशि नियत किए जाने का प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। न्यायाधीश ने प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में 25 हजार रुपये की जमानत धनराशि के बंधपत्र दाखिल किए जाने के बाद आरोपी रमाकांत चौबे को रिहा किए जाने का आदेश पारित किया। (संवाद)

मोहम्मद अहमद उर्फ सलमान का गैर-जमानती वारंट रद किया

अयोध्या। अयोध्या की एक विशेष अदालत ने मोहम्मद अहमद उर्फ सलमान का गैर-जमानती वारंट रद कर दिया है। यह वारंट पॉक्सो और एससी/एसटी अधिनियम से संबंधित एक मामले में जारी किया गया था।

अहमद ने अदालत में 20 हजार रुपये का व्यक्तिगत मुचलका और एक अंडरटेकिंग दाखिल की। उसने हर सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने और अनावश्यक स्थगन आवेदन न देने का वादा किया। अहमद ने बताया कि 18 मई को वह पेशी पर आया था। वह अदालत के बाहर बैठा था और पुकार नहीं सुन पाया। दोपहर 3:30 बजे तक पुकार न होने पर उसे वारंट जारी होने की जानकारी मिली। उसने अनजाने में हुई गलती के लिए माफी मांगी। अदालत ने मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार किया। न्याय हित में वारंट रद्द करने का पर्याप्त आधार पाया गया।
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