अयोध्या। सूरज की पहली किरण जैसे ही अयोध्या की पवित्र धरा को चूमती है, घंटियों की मधुर ध्वनि और जय श्रीराम के नारों से पूरा वातावरण गूंज उठता है। रविवार अयोध्या धाम के लिए कोई साधारण दिन नहीं होता, यह वो अवसर होता है जब समय मानो ठहर जाता है, सांसें भक्ति में रच-बस जाती हैं, और हर हृदय राममय हो उठता है। इस रविवार भी रामलला के दरबार में श्रद्धा का सागर उमड़ा। राजा राम की दिव्य छवि श्रद्धालुओं को मोहित करती रही।
दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं के चेहरे पर यात्रा की थकान नहीं, बल्कि रामलला के साक्षात दर्शन की उत्कंठा नजर आ रही थी। राजस्थान की रेतीली धरती हो या काशी की पावन गलियां, महाराष्ट्र के घाट हों या गुजरात के शहर, रामभक्त देश के कोने-कोने से रामलला व राम दरबार के दर्शन को पहुंचे थे। पूरे परिसर में जैसे भक्ति की बाढ़ आ गई हो। स्त्रियां कीर्तन में लीन, वृद्ध ध्यानमग्न, बच्चे व युवा जय श्रीराम का जयघोष करते हुए दर्शन को जा रहे थे।
भीषण गर्मी पर आस्था का ताप भारी नजर आ रहा था। रामलला के दर्शन करने वाले हर एक श्रद्धालु में राजाराम के दर्शन की लालसा दिख रही थी लेकिन नियमों की लक्ष्मण रेखा उन्हें निराश कर रही थी। राजा राम के दर्शन के लिए अभी सीमित संख्या में पास जारी किए जा रहे हैं, इसलिए सबको दर्शन नहीं मिल पा रहे। जिन्हें राजाराम व माता सीता के दर्शन मिले वे मुग्ध नजर आए, उनके चेहरे पर परम संतोष झलक रहा था।