अयोध्या। झूलनोत्सव के उल्लास में इन दिनों रामनगरी मानो पेंग लगा रही है। सावन की फुहारों, मंदिरों में सजे हिंडोलों और कजरी की मधुर तानों ने अयोध्या की सांझ को उत्सव के रंग में रंग दिया है। जैसे-जैसे झूलनोत्सव का मुख्य पर्व पूर्णिमा करीब आ रहा है, वैसे-वैसे रामनगरी के मठ-मंदिरों में उल्लास की हिलोरें भी तेज होती जा रही हैं।
इन दिनों करीब दो लाख श्रद्धालु अयोध्या में डटे हुए हैं। दिन चढ़ते ही रामभक्त सरयू स्नान और दर्शन-पूजन के लिए निकल पड़ते हैंं। रामजन्मभूमि, कनक भवन, हनुमानगढ़ी समेत प्रमुख मंदिरों में दर्शन के बाद श्रद्धालुओं का रुख शाम होते ही उन मठ-मंदिरों की ओर हो जाता है, जहां भगवान के हिंडोला विहार का मनोरम दृश्य श्रद्धा को नई ऊंचाई देता है। सूरज के ढलते ही रामनगरी का रंग बदल जाता है। मंदिरों के पटों और प्रांगणों में सजे फूलों से महकते हिंडोले, टिमटिमाती रोशनी और भक्ति में डूबे स्वर वातावरण को अलौकिक बना देते हैं। मंदिरों में सिया-राम के विग्रहों को झूले पर विराजमान कर झुलाया जा रहा है। भक्त घंटों कतार में खड़े होकर अपने आराध्य के इस मनोहारी स्वरूप के दर्शन कर रहे हैं।
मंदिरों से उठती कजरी की पंक्तियां शाम की हवा में घुलकर श्रद्धालुओं को बरबस अपनी ओर खींच रही हैं। लोकगीतों की मिठास और भक्ति संगीत का सुरम्य मेल रामनगरी की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर रहा है। पूर्णिमा का पर्व जैसे-जैसे निकट आ रहा है, वैसे-वैसे श्रद्धालुओं की भीड़ और मंदिरों का उल्लास बढ़ता जा रहा है। सरयू की लहरों से लेकर मंदिरों के हिंडोलों तक, हर ओर सावन की पेंग और भक्ति की तरंग है। मानो पूरी रामनगरी ही अपने आराध्यों के साथ झूले पर सवार होकर आनंद की पेंग लगा रही हो।