अयोध्या। जैन मंदिर में बुधवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। मंदिर में भगवान ऋषभदेव का महा मस्तकाभिषेक करते ही मंदिर प्रांगण में घंटियों की मधुर ध्वनि और मंत्रोच्चार का ऐसा पावन माहौल बना, मानो आकाश तक शांति का संदेश पहुंच रहा हो। गणिनी प्रमुख ज्ञानमती ने कहा कि विश्व शांति की नींव करुणा, सहिष्णुता और सत्य पर टिकी है।
उन्होंने कहा कि जब मनुष्य अपने भीतर के अहंकार और क्रोध का त्याग करेगा, तभी धरती पर अमन-चैन स्थायी होगी। मानव का जीवन तभी सार्थक है जब वह अपने भीतर अहिंसा का दीप जलाकर दूसरों के मार्ग को आलोकित करें। जैन मंदिर के पीठाधीश स्वामी रवींद्र कीर्ति ने कहा कि संसार में युद्ध, आतंक और हिंसा का कारण बाहरी परिस्थितियां नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर का असंतुलन है। यदि हर व्यक्ति अपने मन को संतुलित कर लोभ और द्वेष का त्याग कर दे, तो पृथ्वी पर कोई भी शक्ति शांति को डिगा नहीं सकती।
इससे पहले विभिन्न द्रव्यों से भगवान ऋषभदेव का महामस्तकाभिषेक हुआ। मस्तक पर शांतिधारा कर विश्व शांति की कामना की गई। भगवान की महाआरती के दौरान जैन श्रद्धालु भक्तिभाव में लीन नजर आए। श्रद्धालुओं ने सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे संतु निरामया:...की प्रार्थना की। इस दौरान आर्यिका चंदनामती, प्रवक्ता विजय जैन, सुरेंद्र जैन, मनोज जैन, अंशुल जैन सहित विभिन्न प्रांतों से आए श्रद्धालु मौजूद रहे।