अयोध्या। मेडिकल कॉलेज दर्शननगर में रीजेंट्स चोरी के मामले में लगभग 20 दिन बाद पुलिस को आखिरकार तहरीर दे दी गई है। हालांकि इसमें आरोपियों और कॉलेज की जांच रिपोर्ट तक का जिक्र नहीं है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब सीसीटीवी में चोरी करने वाले कैद हुए हैं। पहचान के बाद उनको बर्खास्त किया जा चुका है, फिर नामजद तहरीर क्यों नहीं दी गई।
छह अप्रैल को मेडिकल कॉलेज से रीजेंट्स के गत्ते चोरी करने की सीसीटीवी फुटेज मिली थी। एक ही रात में लगभग 24 गत्ते रीजेंट्स ले जाने वाले आरोपी कॉलेज की केंद्रीयकृत लैब के कर्मचारी बताए गए थे। 13 अप्रैल को भी घटना सीसीटीवी में कैद हुई। इसके बावजूद कॉलेज प्रशासन ने एफआईआर दर्ज नहीं कराई, बल्कि जांच कमेटी बना दी गई। इस कमेटी ने 21 अप्रैल को ही रिपोर्ट सौंप दिया, जिसमें दोनों आरोपियों ने चोरी स्वीकारी। तीसरे व्यक्ति के इशारे पर चोरी होने का दावा किया गया। एक आरोपी के घर से गत्ते बरामद भी हुए। इसके बाद भी केस दर्ज नहीं कराया गया।
इस बीच जिलाधिकारी ने मामले का संज्ञान लिया और प्राचार्य को अपने स्तर से कार्यवाही के निर्देश दिए ताे उन्होंने सीएमएस को पत्र लिखकर केस दर्ज कराने को कहा। सीएमएस ने केंद्रीयकृत लैब इंचार्ज को केस दर्ज कराने के लिए कहा। इसके बाद उन्होंने तहरीर पुलिस को दी है।
चौंकाने वाली बात है कि कॉलेज की जांच में साक्ष्य व बरामदगी के बावजूद आरोपियों का नाम न देकर सीसीटीवी फुटेज के आधार पर तहरीर दी है। सीएमएस डॉ. अरविंद सिंह ने बताया कि एफआईआर दर्ज होने के बाद विवेचना के दौरान सारे तथ्य पुलिस को सौंपे जाएंगे।