राम मंदिर: अस्थायी मंदिर बनकर तैयार
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अयोध्या स्थित राम मंदिर निर्माण के साथ अब रामजन्मभूमि परिसर में अतीत की स्मृतियों को स्थायी धरोहर के रूप में सहेजने का काम भी अंतिम चरण में पहुंच गया है। मंदिर परिसर में रामलला के पुराने अस्थायी मंदिर का निर्माण पूरा हो चुका है। अब केवल फिनिशिंग का काम शेष है। इस स्थान पर वर्षों तक टाट के मंदिर में विराजमान रहे रामलला की गाथा को प्रदर्शित किया जाएगा। इसे धरोहर के रूप में संरक्षित किया जाएगा।
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र ने रविवार को परिसर में निर्माणाधीन 11 मीटर ऊंचे स्मारक स्तंभ का भी निरीक्षण किया। हुतात्मा कारसेवकों की स्मृति में बनाए जा रहे इस स्तंभ का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है।
अधिकारियों से जानकारी ली गई
मिश्र ने स्तंभ के निर्माण की गुणवत्ता और अंतिम चरण के कार्यों की जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने रामलला के पुराने अस्थायी मंदिर के सुंदरीकरण कार्य का गहन निरीक्षण किया। मंदिर के स्वरूप, फिनिशिंग और यहां संरक्षित की जाने वाली ऐतिहासिक स्मृतियों को लेकर संबंधित अधिकारियों से जानकारी ली गई।
निरीक्षण के बाद नृपेंद्र मिश्र ने श्रद्धालु सुविधा केंद्र (पीएफसी) के सभागार में निर्माण कार्यों से जुड़े अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों के साथ बैठक की। दो दिनों के अयोध्या प्रवास के दौरान 14 और 15 सितंबर को निर्माण कार्यों की समीक्षा बैठकें होंगी। 15 सितंबर की बैठक में रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नवनियुक्त सीईओ एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेंद्र मिश्र भी शामिल होंगे।
मध्वाचार्य द्वार का 70 फीसदी काम पूरा
निर्माण समिति चेयरमैन ने क्षीरेश्वरनाथ मंदिर के सामने विकसित हो रहे मध्वाचार्य प्रवेश द्वार की प्रगति भी देखी। द्वार का करीब 70 फीसदी निर्माण पूरा हो चुका है। निर्माण एजेंसियों के मुताबिक इसे 15 अक्तूबर तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
निरीक्षण के बाद उन्होंने राम मंदिर परिसर में कार्यदायी संस्था के इंजीनियरों के साथ बैठक की। बैठक में राम मंदिर के मुख्य इंजीनियर जगदीश आफले सहित अन्य शामिल रहे। नृपेंद्र मिश्र ने ट्रस्ट कार्यालय व ऑडिटोरियम के निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की।