अयोध्या। आकाशीय घटनाओं के क्रम में फाल्गुन कृष्ण अमावस्या मंगलवार को सूर्य ग्रहण लग रहा है, लेकिन इसका प्रभाव भारत में दिखाई नहीं देगा। खगोलीय गणनाओं के अनुसार यह ग्रहण अन्य देशों में दृश्य होगा, जबकि भारत में इसका कोई प्रत्यक्ष असर नहीं रहेगा। ऐसे में यहां न तो सूतक काल मान्य होगा और न ही धार्मिक अनुष्ठानों पर कोई विशेष प्रतिबंध लागू होगा।
ज्योतिषाचार्य पंडित प्रवीण शर्मा के अनुसार चूंकि ग्रहण भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए मंदिरों के पट बंद करने या पूजा-पाठ रोकने की आवश्यकता नहीं है। श्रद्धालु सामान्य दिनचर्या के अनुसार पूजा-अर्चना कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि इस वर्ष का अगला और भारत में प्रभावी खगोलीय संयोग तीन मार्च को चंद्र ग्रहण के रूप में सामने आएगा। यह ग्रहण होली से एक दिन पूर्व पड़ेगा, जिससे पर्व की तैयारियों के बीच धार्मिक चर्चा भी तेज हो गई है। चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए सूतक काल मान्य रहेगा और परंपरानुसार मंदिरों के पट निर्धारित समय पर बंद किए जा सकते हैं।
धर्मशास्त्रों के अनुसार चंद्र ग्रहण के दौरान जप, तप और दान का विशेष महत्व होता है। श्रद्धालु गंगा स्नान, मंत्र जाप और दान-पुण्य कर पुण्य अर्जित करते हैं। पंडित प्रवीण शर्मा ने बताया कि कि इस वर्ष इसके अतिरिक्त कोई अन्य ऐसा ग्रहण नहीं पड़ेगा जो भारत में धार्मिक मान्यता के अनुसार प्रभावी हो। इस कारण तीन मार्च का चंद्र ग्रहण वर्ष का प्रमुख आध्यात्मिक संयोग माना जा रहा है।