अयोध्या। राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज में आंतरिक कलह उभरकर सामने आई है। यहां के छह विभागाध्यक्षों ने प्राचार्य डॉ. सत्यजीत वर्मा के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए प्रमुख सचिव को शिकायती पत्र भेजा है, जिसमें प्राचार्य पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं, प्राचार्य ने आरोपों को निराधार व साजिश का हिस्सा बताया है।
मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक विभागाध्यक्ष डॉ. डीके शर्मा, उनकी पत्नी व फोरेंसिक मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. अंजू सिंह, कम्युनिटी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. प्रतिभा गुप्ता, पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. पारस खरबंदा, मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंद कुमार और माइक्रोबॉयलोजी विभागाध्यक्ष डॉ. स्नेहांशु शुक्ला ने सामूहिक हस्ताक्षरयुक्त शिकायती प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को भेजा है।
नौ सितंबर को भेजे गए इस पत्र में उन्होंने प्राचार्य पर पैसे लेकर नॉन मेडिकल, अयोग्य और अक्षम संकाय सदस्यों की नियुक्ति का आरोप लगाया है। बताया कि अयोग्य शिक्षकों के पढ़ाने से छात्र हतोत्साहित होते हैं तो उन्हें सामूहिक अवकाश पर भेज दिया जाता है। दलालों ने अस्पताल में हर सुविधा का रेट तय किया है। चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मियों को अनुपस्थित रहने के लिए प्रेरित किया जाता है और छूट दी जाती है। इसके एवज में उनसे धन उगाही की जाती है। क्रय संबंधी कार्य बायोकेमिस्ट्री विभाग के नॉन मेडिकल, अनाधिकृत और सबसे जूनियर लोगों से कराया जाता है।
कॉलेज काउंसिल के वरिष्ठ संकाय सदस्यों और विभागाध्यक्षों को कॉलेज और चिकित्सालय संबंधी निर्णयों में शामिल नहीं किया जाता है। अयोग्य आउटसोर्स कर्मियों की नियुक्तियां गोपनीय ढंग से की गई है। डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, तकनीकी स्टाफ आदि को बिना विभागाध्यक्ष को सूचना दिए हटा दिया जाता है। सभी ने प्राचार्य को पद से हटाकर उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।
वहीं, प्राचार्य डॉ. सत्यजीत वर्मा ने बताया कि एक साजिश के तहत शिकायत की गई है, जिसमें लगे सभी आरोप निराधार हैं। शिकायत करने वाले विभागाध्यक्ष पूर्व में कई भ्रम की स्थिति पैदा करके आरोप लगा चुके हैं। इससे उन्होंने कॉलेज और सरकार की छवि धूमिल की है। सभी तथ्यों से शासन को अवगत कराया जाएगा। वह हर जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं।