अयोध्या। एक ही शव की विरोधाभासी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने वाले डॉक्टर ने ऑनलाइन पीएम रिपोर्ट पर अपने हस्ताक्षर भी किए थे। जांच में खुद को फंसता देख इसे ऑपरेटर की लिपिकीय त्रुटि बताकर पल्ला झाड़ने लगे। वहीं, ऑपरेटर ने डॉक्टर के आरोपों को खारिज करते हुए डॉक्टर के निर्देशानुसार रिपोर्ट तैयार करने का दावा किया है।
14 जून को रौनाही थाना क्षेत्र के लोनियाबाग मदरसे के मोड़ के पास लखनऊ के मड़ियांव क्षेत्र के ताड़ीखाना, पलटन छावनी कटरा निवासी साहिल का शव मिला था। 16 जून को शव का पोस्टमार्टम सीएचसी खंडासा में तैनात डॉ. अभिमन्यु सिंह ने किया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डॉक्टर ने शरीर पर कोई बाह्य चोट न होने व मौत की वजह ह्रदयजनित आघात बताया था। परिजनों ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट से असंतोष जाहिर करके दोबारा पोस्टमार्टम की मांग की।
उच्चधिकारियों के निर्देश पर डॉ. सुनील कुमार चौधरी के साथ डॉ. अभिमन्यु सिंह ने देर रात लगभग 11:20 बजे से 01:25 के मध्य पोस्टमार्टम किया तो मृतक के शरीर पर 13 चोटें मिलीं। इस बार मौत का कारण गला घोंटना और दम घुटना बताया गया। हत्या जैसे गंभीर मामले में इस तरह की विरोधाभासी रिपोर्ट से स्वास्थ्य विभाग की किरकिरी हुई। वहीं, इसे गंभीर प्रकरण मानकर एसएसपी ने जिलाधिकारी को पत्र भेजा। जिलाधिकारी ने मामले की जांच कराकर दोषी चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए।
सीएमओ ने 23 जून को तीन सदस्यीय कमेटी बनाकर जांच शुरू कराई है। सूत्रों के अनुसार डाॅ. अभिमन्यु ने अपने बयान में रिपोर्ट तैयार करने वाले ऑपरेटर की लापरवाही बताई है, लेकिन यह बात किसी के गले नहीं उतर रही है। ऑपरेटर के रिपोर्ट तैयार करने के बाद उस पर पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक के हस्ताक्षर होते हैं। इसके बाद ही रिपोर्ट अग्रसारित होती है। इस प्रकरण में भी ऐसा ही हुआ है, इसके बावजूद ऑपरेटर पर आरोप मढ़ने से भी सवाल उठ रहे हैं। वहीं, ऑपरेटर ने चिकित्सक के निर्देशानुसार ही रिपोर्ट बनाने का दावा करते हुए बयान दर्ज कराया गया है।