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Ayodhya News: रेफरल सेंटर बन कर रह गया श्रीराम अस्पताल

Sat, 27 Jul 2024 02:26 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
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केस एक :
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उल्टी-दस्त से पीड़ित थी बच्ची, भेज दिया जिला अस्पताल



-रानोपाली निवासी राहुल की आठ माह की पुत्री को उल्टी-दस्त होने पर परिजन 18 जुलाई को श्रीराम अस्पताल ले गए। वहां से संसाधनों की कमी बताकर रेफर कर दिया गया। जिला अस्पताल में मरीज सुबह 09:35 बजे पहुंची, जिसे भर्ती करके इलाज किया गया।

केस दो :



सीने में था दर्द, नहीं मिली पनाह

-शहर के अमानीगंज पठान टोलिया निवासी जितेंद्र कुमार गौतम की पत्नी ज्योति (40) सीने में दर्द की समस्या लेकर 22 जुलाई को श्रीराम अस्पताल पहुंचीं, लेकिन उन्हें पनाह नहीं मिली और रेफर कर दिया गया। वह जिला अस्पताल में रात 10:40 बजे भर्ती हुईं।
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केस तीन :

आयुष्मान का था मरीज, नहीं हुआ हड्डी का ऑपरेशन



-रामदासपुर निवासी रामसंवारी (60) फ्रैक्चर होने पर श्रीराम अस्पताल में पहुंचीं। वह आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र थीं। इसकी जानकारी भी उन्होंने दी, लेकिन संसाधनों की कमी बताकर उन्हें रेफर कर दिया गया। परिजनों ने मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। उनका ऑपरेशन होने पर 24 जुलाई को डिस्चार्ज किया गया।

केस चार :



उल्टी, पेटदर्द के मरीज भेज दिया मेडिकल कॉलेज

-अख्तियारपुर निवासी सोहनलाल की पुत्री शिव देवी (19) को उल्टी और पेटदर्द होने पर परिजन बुधवार की शाम श्रीराम अस्पताल ले गए। वहां से बृहस्पतिवार को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। ट्रामा सेंटर में भर्ती करके मरीज का इलाज हुआ।



अयोध्या। यह मामले तो सिर्फ उदाहरण के तौर पर पेश किए गए हैं। इसी तरह राजकीय श्रीराम अस्पताल में विशेषज्ञों की मौजूदगी के बावजूद रोज कई मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज पहुंचने पर मरीजों को काफी भीड़ में संघर्ष करके इलाज कराना पड़ता है। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को तोड़ने के लिए प्रशासनिक अधिकारी भी ठोस पहल नहीं कर रहे हैं।

श्रीराम मंदिर से सटे राजकीय श्रीराम अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों के 30 पद स्वीकृत हैं। इसके सापेक्ष तैनात चिकित्सकों की सही जानकारी सीएमएस को भी नहीं है। फिर भी एक फिजिशियन, एक सर्जन, दो आर्थो आर्थो सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ, चर्म रोग विशेषज्ञ, निश्चेतक, रेडियोलॉजिस्ट समेत अन्य कई चिकित्सकों की तैनाती बताई गई है। यहां तक कि पैथॉलोजिस्ट भी फिजिशियन की तरह ओपीडी में बैठकर मरीज देखते हैं। लेकिन यह सभी चिकित्सक सिर्फ ओपीडी तक ही मुस्तैद रहते हैं। खचाखच भरी ओपीडी में मरीजों को धड़ल्ले से बाहर की कमीशनयुक्त दवायें लिखते हैं और इमरजेंसी पहुंचने वाले अधिकांश मरीजों को रेफर कर देते हैं।



जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज में रोज तीन-चार मरीज यहां से रेफर किए पहुंचते हैं। चिकित्सकों के अनुसार कुछ तो गंभीर होते हैं, लेकिन सामान्य मरीजों को भी संसाधनों की कमी बताकर रेफर कर दिया जाता है। इन अस्पतालों में पहले से ही भीड़ होने के कारण मरीजों को तमाम कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ता है।
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इनसेट



अल्ट्रासाउंड, एक्सरे व पैथोलॉजी की भी सुविधा

-श्रीराम अस्पताल में जांचें भी पर्याप्त होती हैं। यहां अल्ट्रासाउंड, एक्सरे के अलावा पैथोलॉजी खून की जांच की सुविधा भी मौजूद है। इसके बावजूद मरीजों को रेफर करने से विशेषज्ञ पीछे नहीं हटते हैं।



श्रीराम अस्पताल के सीएमएस डॉ. वीके वर्मा से दो टूक

सवाल : अस्पताल में विशेषज्ञों की तैनाती है?
जवाब : लेवल-दो के अधिकांश पद स्वीकृत हैं, जिसके सापेक्ष लेवल-चार के विशेषज्ञ तैनात हैं।
सवाल : अस्पताल से उल्टी-दस्त के मरीज भी रेफर कर दिए जा रहे हैं?
जवाब : सभी मरीजों को नहीं रेफर किया जाता, लेकिन यदि किसी का गुर्दा खराब है, क्रिटनिन बढ़ा है और डायलिसिस की जरूरत है तो उन्हें रेफर कर दिया जाता है।
सवाल : एक मरीज की हड्डी का ऑपरेशन था, उसे भी रेफर कर दिया गया।
जवाब : हमारे यहां हड्डी के सबसे ज्यादा ऑपरेशन होते हैं। किस अंग का ऑपरेशन था, यह उस पर निर्भर करता है।
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