अयोध्या। रामनगरी की सुरक्षा व्यवस्था एआई सॉल्यूशंस (आर्टीफीशियल इंटीलिजेंस) के जरिये अभेद्य की जाएगी। इसके तहत अयोध्या धाम के विभिन्न माध्यमों पर लगे लगभग 10 हजार सीसीटीवी कैमरे एक सॉफ्टवेयर से एकीकृत होंगे। इनकी मदद से पल भर में ही किसी भी संदिग्ध की गर्दन तक पुलिस पहुंच सकेगी।
मंदिर-मस्जिद विवाद की शुरुआत होने के समय से ही अयोध्या अतिसंवेदनशील रही है। समय-समय पर आतंकी संगठनों के निशाने पर भी अयोध्या रही है। सदियों के विवाद के पटाक्षेप के बावजूद बीच-बीच में आतंकी हमले व अन्य गतिविधियों को लेकर धमकियां मिलती रहती हैं। इसके अलावा जिले में हर समय रामलला के दर्शन-पूजन को वीवीआईपी दौरे भी होते हैं। इस लिहाज से सुरक्षा तंत्र मजबूत किया गया है। अब इसमें तकनीक का अधिक उपयोग करने की योजना है। इसके लिए पुलिस एआई सॉल्यूशंस का उपयोग करेगी।
आईजी प्रवीण कुमार ने बताया कि इस तकनीक से फेस रिकग्निशन आसानी से हो सकेगा। किसी भी संदिग्ध का स्केच सॉफ्टवेयर में डालते ही उसकी सटीक लोकेशन पता चलेगी। संदिग्ध व्यक्ति की कपड़े से पहचान हो सकेगी। किसी विशेष रंग के कपड़े वाले व्यक्ति को खोजने के लिए सॉफ्टवेयर की मदद से संबंधित इलाके में उस विशेष रंग के पहने कपड़ों वाले सभी व्यक्ति चिह्नित हो जाएंगे, जिनकी जांच के बाद अपराधी तक पहुंचा जा सकेगा।
सीसीटीवी कैमरों में अपराधियों का चेहरा कैद होते ही एआई की मदद से कंट्रोल रूम में अलर्ट चला जाएगा। वहीं, बार-बार वाहनों के नंबर प्लेट बदलकर घूमने वालों पर भी शिकंजा कसा जा सकेगा। उन्होंने बताया कि इस महत्वपूर्ण सेवा के लिए प्रस्ताव तैयार करके शासन भेजा गया है। वहीं से बजट जारी होकर कार्य प्रारंभ होगा।