अयोध्या। सरयू नदी अभी भी खतरे के निशान से 39 सेमी ऊपर बह रही है। बृहस्पतिवार शाम पांच बजे नदी का जलस्तर 93.12 मीटर दर्ज किया गया। खतरे का निशान 92.73 मीटर है। जलस्तर में उतार-चढ़ाव के बीच तटीय इलाकों में कटान का खतरा बढ़ गया है। शुजागंज क्षेत्र के पटरंगा मांझा गांव में अब तक छह घर नदी की धारा में समा चुके हैं। अयोध्या शहर के निर्मलीकुंड में तेज धारा की चपेट में आने से छह अस्थायी दुकानें कटकर लहरों में समा गईं।
निर्मलीकुंड में छह दुकानें तेज धारा से कटी
सरयू की तेज धारा से निर्मलीकुंड के आसपास किनारे की मिट्टी तेजी से कट रही है। स्थानीय निवासी अमरजीत निषाद, विजय और अरुण के मुताबिक, जलस्तर बढ़ने के साथ कटान भी तेज हो गया। देखते ही देखते छह अस्थायी दुकानें नदी की धारा में समा गईं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जलस्तर में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो तट के आसपास मौजूद अन्य दुकानों और लोगों के लिए भी खतरा बढ़ सकता है। प्रशासन की ओर से लोगों को सतर्क रहने की हिदायत दी जा रही है।
गुप्तारघाट पर नौका विहार बंद
जलस्तर बढ़ने के बाद गुप्तारघाट पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। लोगों को नदी के अधिक करीब जाने से रोकने के लिए घाट पर रस्सी लगाई गई है। प्रशासन ने नौका विहार पूरी तरह बंद कर दिया है। नौका संचालन बंद होने से इससे जुड़े लोगों का काम भी प्रभावित हुआ है। घाटों पर पहुंच रहे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी नदी से दूर रहने की सलाह दी जा रही है।
पानी घटा, कटान बरकरार
शुजागंज क्षेत्र में सरयू का जलस्तर बीती रात से घटने लगा है, लेकिन नदी अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। पानी घटने के साथ ही पटरंगा मांझा गांव के ग्रामीणों की चिंता कटान को लेकर बढ़ गई है। ग्रामीणों के अनुसार, अब तक छह लोगों के घर नदी की धारा में समा चुके हैं। प्रभावित परिवार अपनी गृहस्थी समेटकर सुरक्षित स्थानों पर रहने को मजबूर हैं। गांव के वीरेंद्र ने बताया कि नदी की कटान के कारण वह अब तक तीसरी जगह छप्पर रख चुके हैं। वहीं केतारे, दुधाई, ननकू, अरविंद और राजेंद्र ने बताया कि नदी का पानी घटने-बढ़ने से उनकी मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पटरंगा मांझा आने-जाने के लिए अभी तक नाव की व्यवस्था नहीं हो सकी है।
घरों में पानी भरने से छप्पर गिर रहे
कैथी मांझा गांव के शिवकुमार, पुत्तीलाल, फूल बहादुर और तुलसीराम ने बताया कि घरों में पानी भरने से छप्पर गिर रहे हैं। परिवारों को बार-बार अपना सामान समेटकर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रभावित इलाकों में आवागमन के लिए नाव की व्यवस्था और कटान से बचाव के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
बाढ़ के बाद का दृश्य।
बाढ़ के बाद का दृश्य।
बाढ़ के बाद का दृश्य।