अयोध्या। संत रविदास मंदिर में आयोजित लोकार्पण समारोह में पहुंचे सीएम योगी आदित्यनाथ ने सबसे पहले संत रविदास, महात्मा बुद्ध और संविधान निर्माता डॉ़ भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। मंदिर के गर्भगृह में पूजा की। लोकार्पण समारोह में समरसता, समानता व सेवा का संदेश गूंजा। यह पहला अवसर था जब किसी समारोह में अयोध्या के सभी जातीय मंदिरों के महंत मौजूद रहे। सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री का विकसित भारत का संकल्प संत रविदास जी की प्रेरणा से ही आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि संत रविदास ने कहा था कि ऐसा चाहूं राज मैं, जहां मिले सबन को अन्न, छोट बड़ा सब संग बसे, रैदास रहे प्रसन्न... उनका यही दर्शन प्रधानमंत्री के संकल्प का आधार है। हमारा देश तभी विकसित भारत बनेगा, जब हम एकजुट होकर जातिगत और आर्थिक विषमताओं को दूर कर सकेंगे। संत रविदास को मध्यकालीन संत परंपरा का सिद्ध संत बताते हुए कहा कि उन्होंने कर्म प्रधान व्यवस्था के माध्यम से सामाजिक चेतना को जागृत किया और सामाजिक विसंगतियों के खिलाफ मजबूती से आवाज उठाई।
समारोह के समापन पर सीएम योगी ने सभी जातीय मंदिरों के महंतों के साथ सहभोज में भी हिस्सा लिया। इससे पहले महंत बनवारीपति ने सीएम योगी का अभिनंदन किया। समारोह को वाराणसी से आए संत भारत भूषण, महंत वीरेंद्र दास आदि ने भी संबोधित किया। संचालन प्रधानाचार्य अवनि शुक्ला ने किया। समारोह में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, संघ के प्रांत प्रचारक कौशल, महानगर प्रचारक सुदीप, महानगर संघ चालक डॉ. विक्रमा प्रसाद पांडेय, प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही, राजस्थान के विधायक महंत बालकनाथ, गुरु रविदास विश्व महापीठ नई दिल्ली के अध्यक्ष सुरजीत कुमार, महामंत्री अशोक भारती, सुकृति साहब, महंत छत्तर दास, महंत स्वामी दास, महंत रामानुज दास, विहिप के प्रवक्ता शरद शर्मा समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
- मुख्यमंत्री ने मध्यकाल के कठिन समय का जिक्र करते हुए कहा कि जब विदेशी हमलावरों के अत्याचार और सनातन धर्म पर खतरे के बादल मंडरा रहे थे, तब काशी में संत रविदास ने सामाजिक एकता के लिए समाज को जागरूक किया। संत रविदास ने आडंबर के खिलाफ आवाज उठाई और कर्म को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनकी कहावत ''मन चंगा तो कठौती में गंगा'' आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने पासी समाज, कबीर मठ और रजक समाज के संतों को आश्वासन दिया कि सरकार सभी वर्गों को जोड़कर आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है।
- संत रविदास मंदिर के महंत बनवारीपति ब्रह्मचारी ने कहा कि संत रविदास ने ऐसे समाज की परिकल्पना की जहां न जाति हो, न भेद, केवल मानवता हो। प्रदेश सरकार संत-महापुरुषों की स्थली और शिक्षाओं को संजोने के लिए सतत प्रयासरत है। संत रविदास समाज के लिए एक दीप स्तंभ हैं। महंत वैदेही बल्लभ शरण ने कहा कि आज पीएम मोदी के नेतृत्व में पूरे देश में समरसता दिख रही है। सीएम योगी भी सामाजिक न्याय और एकात्मकता के पुनीत अभियान में लगे हैं। समरसता की वाणी ही नवनिर्माण का स्वर बनेगी।