अयोध्या। दीवानी न्यायालय परिसर में किसी घोटाले की सुगबुगाहट कर्मचारियों में आपस में महीनों से चली आ रही थी, जिसका पर्दाफाश रिपोर्ट दर्ज होने के बाद हुआ है। अपर सत्र न्यायाधीश की जांच में न्यायालय कर्मचारी पीयूष श्रीवास्तव व हृदयराम का नाम प्रकाश में आया है। 64 लाख रुपये के वेतन घोटाले के मामले में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी एजाज अहमद ने रिपोर्ट दर्ज कराई है।
प्रारंभिक जांच में वेतन बिलों में हेराफेरी करके पैसे निकालने की पुष्टि होने पर जिला जज रणंजय कुमार वर्मा ने कर्मचारियों पीयूष श्रीवास्तव व हृदयराम को निलंबित किया है। दर्ज प्राथमिकी के अनुसार मुख्य कोषाधिकारी ने जिला जज को सूचना दी कि न्यायिक कर्मचारी हृदय राम के वेतन खाते में तीन साल के अंदर 64,95,504 रुपये की निकासी हुई है। यह रकम उन्हें मिलने वाले वेतन से कई गुना अधिक है।
जिला जज के निर्देश पर एडीजे/आहरण व वितरण अधिकारी ने इसकी जांच की। जांच में बिल अनुभाग के कर्मचारी वेतन लिपिक पीयूष श्रीवास्तव के हृदय राम के खाते में 64,95,504 रुपये का भुगतान करवाना पाया गया। यह भुगतान कूट रचित बिलों के माध्यम से वेतन अनुभाग के अन्य कर्मचारियों अनुराग दुबे व संतोष को धोखे में रखकर अप्रैल 2022 से दिसंबर, 2025 के बीच किया गया है।
कूट रचित बिलों के माध्यम से इतनी बड़ी रकम के भुगतान में कोषागार कार्यालय के कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका जताई गई है। एडीजे की प्रारंभिक जांच में नाम आने से ही पीयूष श्रीवास्तव ने कार्यालय आना छोड़ दिया है। रिपोर्ट में बताया गया कि वेतन आहरण व वितरण अधिकारी के आधिकारिक डीएससी, डोंगल सहित कई जरूरी सूचनाएं पीयूष के निजी लैपटॉप में हैं।
अधिवक्ताओं व न्यायिक कर्मचारियों ने वेतन घोटाले में अभी और खुलासा होने व कई लोगों के शामिल होने की आशंका जताई है। कई दिन बाद सोमवार को कचहरी खुलने पर मामले में और गर्माहट आएगी। फैजाबाद बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने न्यायालय में एक ही स्थान पर कई वर्षों से जमे बाबू, पेशकार व कर्मचारी को स्थानांतरित करने की मांग उठाई है।