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Ayodhya News: बुजुर्गों के कंधों पर राम मंदिर ट्रस्ट की जिम्मेदारी

Wed, 01 Jul 2026 11:20 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
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अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच ट्रस्ट की वर्तमान संरचना भी बहस का विषय बन गई है। ट्रस्ट के 14 सदस्यों में अधिकांश वरिष्ठ आयु वर्ग के हैं और कई सदस्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
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ऐसे में करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े देश के प्रमुख धार्मिक ट्रस्टों में शामिल इस संस्थान की दीर्घकालिक सक्रियता और प्रशासनिक क्षमता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास लंबे समय से अस्वस्थ हैं और नियमित रूप से सक्रिय नहीं रह पा रहे हैं। वहीं, महासचिव चंपत राय लगभग 80 वर्ष की आयु में भी ट्रस्ट के सबसे सक्रिय पदाधिकारियों में शामिल हैं। मंदिर प्रबंधन से जुड़े अधिकांश प्रशासनिक निर्णयों और समन्वय की जिम्मेदारी फिलहाल उनके कंधों पर है।
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ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य के. पारासरण 95 वर्ष की आयु पार कर चुके हैं। इसी प्रकार जगद्गुरु वासुदेवानंद सरस्वती और युगपुरुष परमानंद भी बढ़ती उम्र के कारण स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा भी लंबे समय से आंखों की समस्या से जूझ रहे हैं।

कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरी की सक्रियता मुख्य रूप से ट्रस्ट की बैठकों और प्रमुख आयोजनों तक सीमित रहती है। वहीं, जगद्गुरु विश्वप्रसन्न तीर्थ की उपस्थिति भी विशेष अवसरों और बैठकों में ही देखने को मिलती है। महंत दिनेंद्र दास स्वास्थ्य की दृष्टि से सक्रिय हैं, हालांकि ट्रस्ट के संचालन में उनकी भूमिका अपेक्षाकृत सीमित मानी जाती है।

इनसेट
निर्माण के बाद संचालन की चुनौतियां बढ़ीं

निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा भी 75 वर्ष से अधिक आयु के हैं। हालांकि मंदिर निर्माण कार्य की निगरानी और समयबद्ध प्रगति सुनिश्चित करने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

राम मंदिर का निर्माण अब लगभग पूरा हो चुका है। इसके साथ ही मंदिर के नियमित संचालन की जिम्मेदारियां पहले की तुलना में कहीं अधिक बढ़ गई हैं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन, चढ़ावे का प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, वित्तीय पारदर्शिता और प्रशासनिक निगरानी जैसी चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या ट्रस्ट अपनी वर्तमान संरचना के साथ इन बढ़ती जिम्मेदारियों का लंबे समय तक प्रभावी और सुचारु ढंग से निर्वहन कर पाएगा।
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