अयोध्या। श्रीराम जन्मोत्सव की महिमा वेदों में कही गई है। मान्यता है कि रामनवमी पर समस्त तीर्थ अयोध्या पैदल चल कर आते हैं। श्रीराम जन्म पर अयोध्या में जो भी उपस्थित होता है उसके जन्म जन्मांतर के सारे पाप समाप्त हो जाते हैं। इन्हीं मान्यताओं के चलते हर रामनवमी पर अयोध्या में तीर्थों का कुंभ लगता है। इस राम जन्मोत्सव पर भी आस्था की धारा प्रवाहित होती रही। संत-धर्माचार्यों ने इस अवसर पर जन्मोत्सव की महिमा का बखान किया।
जगद्गुरू रामदिनेशाचार्य ने कहा कि राम का अर्थ है स्वयं का प्रकाश। राम हमारी आत्मा का प्रकाश हैं। इसलिए रामनवमी का पर्व आत्म प्रकाश के उदय का पर्व है। श्रीराम का जन्म सुख का मूल है। महंत रामशरण दास ने कहा कि श्रीरामजन्म का अर्थ है धर्म, आनंद का प्रकट होना। अयोध्या में तीर्थों का कुंभ लगता है। तीर्थराज प्रयागराज भी रामनवमी पर अपनी कालिमा धुलने अयोध्या आते हैं और सरयू स्नान करते हैं। महंत डॉ़ भरत दास ने कहा कि रामजन्म के दिन समस्त देवी-देवता अयोध्या पधारते हैं। रामचरित मानस में लिखा है कि सो अवसर बिरंचि जब जाना। चले सकल सुर साजि बिमाना... जब ब्रह्माजी ने भगवान के प्रकट होने का अवसर जाना तब सारे देवता विमान सजा-सजाकर चले। रामजन्मोत्सव पर अयोध्या में इस बार कुछ इसी तरह का दृश्य रहा।