प्रभु रामलाल की आराधना के लिए तैयार की गई रामोपासना नाम की नूतन पोथी
संवाद न्यूज एजेंसी अयोध्या। प्रभु रामलला की सेवा आराधना करने के लिए रामोपासना नाम की नूतन पोथी तैयार की गई है। भव्य महल में विराजमान होने वाले रामलला की पूजा आराधना इस पोथी के अनुसार की जाएगी। पूजा की नई पद्धति की खास बात यह है कि इसमें बाल रूप रामलला और उनके तीनों भाइयों की स्तुति की जाएगी।
कौशल्या सुप्रजा राम पूर्वासंध्या प्रवर्तते। उत्तिष्ठ नरशार्द्रुल कर्तव्य दैवमाहिरकिम... उत्तिष्ठोत्तिष्ठ भद्रं ते त्यज निद्रा जगत्पते... यह वह मंत्र है, जो हर सुबह रामलला को जगाने के लिए सुनाया जाएगा। उसके बाद मंत्रों से उनका आचमन होगा। स्नान कराने के लिए भी मंत्र पढ़े जाएंगे। इसके अलावा हनुमान जी महाराज, राम जन्म भूमि, कृष्ण जन्मभूमि, काशी विश्वनाथ, अयोध्या धाम, सरयू महारानी ,स्वामी रामानंदाचार्य, गोस्वामी तुलसीदास सहित सत्य सनातन धर्म, गौ माता व भारत माता की भी जय घोष की जाएगी। संध्या आरती के लिए भी श्लोक की रचना की गई है। रामलला को सुलाने के लिए भी मंत्र सुनाए जाएंगे।
मां जानकी का पूजन पोथी से अलग
इस पूजन पद्धति को लेकर एक खास पुस्तक का निर्माण किया गया है। पुस्तक में भगवान राम के दैनिक पूजन का ब्यौरा दिया गया है। इसमें भगवान की पूजा-अर्चना और सेवा करने की जानकारी है। राम जन्मभूमि में भगवान रामलला पांच वर्ष बालक के स्वरूप में विराजमान हैं। ऐसे में इस पुस्तिका में सूक्ष्म बदलाव किया गया है। रामलला के प्रधान पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि भगवान की पूजन पद्धति रामानंदीय प्रथा से की जाती है। इस नूतन पोथी में केवल मां जानकी की पूजन को अलग किया गया है। पहले प्रभु राम की स्तुति माता सीता के साथ थी। राम जी का जन्म स्थान होने की वजह से भगवान रामलला और उनके भाइयों की ही पूजा बालक रूप में की जाएगी। उसी का पूरा ब्यौरा पुस्तिका में दिया गया है।