रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू
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सूत्रों के मुताबिक, सुभाष ने कहा कि चोरी की पूरी साजिश टिन्नू, अनुकल्प और लवकुश ने रची थी। यही सब तय करते थे कि कब और कैसे रकम पार करनी है। इसमें टिन्नू की भूमिका बेहद अहम रही। सुभाष ने कहा कि टिन्नू के पास वे सभी अधिकार थे, जो ट्रस्ट के पदाधिकारियों के पास थे। उसकी मौजूदगी में कोई भी कुछ नहीं बोलता था। इसलिए रकम पार होती रही।
बोला... सेवा करता हूं
पूछताछ में सुभाष ने यह भी कहा कि वह मंदिर में सेवा करने के लिए जुड़ा था। कई वर्षों से बिना किसी वेतन के वह काम करता आया। एक तरह से उसका इशारा यह भी था कि वह इसमें शामिल जरूर था, लेकिन इसके खिलाफ भी नहीं जा सकता था। इसकी वजह टिन्नू था, क्योंकि उसे भी पता था कि टिन्नू यादव चंपत राय का सबसे करीबी था। इसलिए सुभाष भी वही करता रहा, जो टिन्नू व अन्य लोग कर रहे थे। बाद में वह भी उसी में शामिल हो गया।
सुभाष ने पुलिस को बताया कि जिस दिन केवल सिक्कों की गणना होती थी, उस दिन इन सभी की ड्यूटी नहीं लगाई जाती थी, क्योंकि पता था कि सिक्कों की गिनती में फायदा नहीं होगा। इतने सिक्के वे नहीं ले जा सकते थे, जितने के नोट पार करते थे। इसलिए उस दौरान दूसरे कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाती थी।
कई और नाम आए सामने
आरोपियों ने कई और लोगों के नाम बताए हैं। पुलिस अब उनकी भूमिका की जांच कर रही है। आरोपियों ने अपनी कुछ संपत्ति आदि के बारे में भी जानकारी दी है। पुलिस अब उसका सत्यापन करेगी। वहीं, टिन्नू यादव को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है।