अयोध्या। राम मंदिर रात में भी चमकमा-दमकता नजर आएगा। राम मंदिर को रोजाना रात के समय दो से तीन घंटे तक विशेष प्रकाश से रोशन किया जाएगा। रात में जगमग करने के लिए हाइब्रिड लाइटिंग मॉडल का इस्तेमाल किए जाने पर चर्चा हो रही है। ट्रस्ट ने हाइब्रिड मॉडल उपलब्ध कराने वाली कंपनियों से आवेदन मांगा है।
राम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि राम मंदिर को रात में विशेष लाइटों से जगमग करने की योजना बनी है। इसके लिए चार कंपनियों ने प्रस्तुतीकरण दिया है। बैठक हाइब्रिड लाइटिंग मॉडल पर भी चर्चा हुई। इसमें प्रोजेक्टर और लीनियर लाइटिंग होती है। लीनियर लाइटिंग लेजर लाइट की तरह काम करती है। इससे जिस पर प्रकाश फेंका जाता है, उसकी छाया नहीं पड़ती है। तय हुआ है कि ऐसी कंपनियां जो हाइब्रिड मॉडल दे सकती हैं उन्हें प्रपोजल भेजा जाएगा। अगले 15 दिन में तकनीक ऑफर प्राप्त कर मूल्यांकन होगा।
नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि सप्त मंडपम व परकोटा में बन रहे मंदिरों का काम सितंबर तक पूरा हो जाएगा। जैसे-जैसे मंदिर पूरे होते जाएंगे उनमें मूर्तियों की स्थापना की जाएगी। 15 मार्च से 30 अप्रैल के बीच परकोटा व सप्त मंडपम की सभी मूर्तियां बनकर अयोध्या पहुंच जाएंगी। सबसे पहले संत तुलसीदास की मूर्ति स्थापित होगी। इसके बाद राम मंदिर के दूसरे तल पर रामदरबार की स्थापना की जाएगी। फिर अन्य मूर्तियों को मंदिरों में स्थापित किया जाएगा।
नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि अतिथि गृह, विश्राम गृह व ट्रस्ट कार्यालय का निर्माण शुरू कर दिया गया है। बताया कि दिसंबर के अंत तक ये सभी काम पूर कर लिए जाएंगे। विश्रामालय पांच सौ लोगों की क्षमता का होगा। इसके निर्माण में तीन करोड़ खर्च होने का अनुमान है।
हाइब्रिड लाइटिंग एक ऐसी लाइटिंग विधि है जिसमें इमारतों को रोशन करने के लिए कृत्रिम प्रकाश के साथ सौर प्रकाश का उपयोग किया जाता है । सौर प्रकाश को फाइबर ऑप्टिक केबल बंडलों के माध्यम से प्रवाहित किया जाता है और इस प्रकाश को किसी प्रकार की कृत्रिम रोशनी के साथ पूरक किया जाता है। हाइब्रिड लाइटिंग छत पर स्थापित एक या एक से अधिक मिरर डिश से इमारतों में प्राकृतिक रोशनी लाती है। ये डिश आकाश में सूर्य का अनुसरण करने के लिए घूम सकती है।