देशभर के मंदिरों के लिए तैयार होंगे प्रशिक्षित पुजारी
ट्रस्ट की बैठक में धार्मिक समिति को अर्चकों के प्रशिक्षण, नियुक्ति और उनके आचरण की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने बताया कि राम मंदिर परिसर में वर्तमान में 14 मंदिर हैं, जिनके संचालन के लिए बड़ी संख्या में प्रशिक्षित अर्चकों की आवश्यकता है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ट्रस्ट स्थायी अर्चक प्रशिक्षण पाठशाला की स्थापना करेगा।
उन्होंने बताया कि इससे पहले ट्रस्ट ने एक वर्ष का अर्चक प्रशिक्षण केंद्र संचालित किया था, जिसमें लगभग 30 प्रशिक्षित अर्चक तैयार किए गए थे। बाद में यह व्यवस्था बाधित हो गई थी। अब नई व्यवस्था के तहत नियमित रूप से प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रशिक्षण पाठशाला में अर्चकों को पूजा-पद्धति, वैदिक मंत्रों के शुद्ध उच्चारण, कर्मकांड, मंदिर प्रबंधन तथा रामानंदी परंपरा के अनुरूप सेवा-पूजा का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा करने वाले अर्चकों को प्रमाणपत्र भी प्रदान किया जाएगा, जिससे वे देशभर के विभिन्न मंदिरों में अपनी सेवाएं दे सकें। ट्रस्ट का मानना है कि इस पहल से राम मंदिर की धार्मिक व्यवस्था और अधिक व्यवस्थित होगी तथा वैदिक परंपराओं के अनुरूप प्रशिक्षित अर्चकों की उपलब्धता भी सुनिश्चित हो सकेगी।
रिक्त पदों पर नियुक्ति को लेकर हुआ लंबा मंथन
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बुधवार को हुई बैठक में महासचिव और रिक्त ट्रस्टी पदों पर नियुक्ति को लेकर लंबा मंथन हुआ, लेकिन किसी भी नाम पर अंतिम सहमति नहीं बन सकी। अब इन महत्वपूर्ण नियुक्तियों पर फैसला लेने के लिए दो सितंबर को ट्रस्ट पदाधिकारियों की बैठक फिर बुलाई गई है।
बैठक में महासचिव पद के लिए विश्व हिंदू परिषद के महामंत्री बजरंग लाल बांगड़ा के नाम पर विस्तार से चर्चा हुई, लेकिन सभी ट्रस्ट सदस्यों की सहमति नहीं बन पाई। इसी तरह रिक्त सदस्य पदों के लिए दिनेश चंद्र और अयोध्या राजपरिवार के सदस्य यतींद्र मोहन के नामों पर भी विचार हुआ।
कुछ ट्रस्टियों ने दोनों नामों का समर्थन किया, जबकि कुछ सदस्यों ने आपत्ति जताई, जिसके कारण नियुक्ति का निर्णय टाल दिया गया। इस दौरान यह सुझाव भी सामने आया कि राम मंदिर ट्रस्ट में अयोध्या के किसी प्रमुख संत को भी ट्रस्टी के रूप में शामिल किया जाए। इस प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई, लेकिन अंतिम निर्णय अगली बैठक तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
बैठक में राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण और उससे जुड़े विवाद पर भी चर्चा हुई। ट्रस्ट के सदस्यों ने पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र की भूमिका पर विचार किया और चंपत राय को पूरे मामले में निर्दोष बताया। बैठक में कहा गया कि अब तक की जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, उनके अनुसार पूरा घटनाक्रम बैंक की लापरवाही के कारण हुआ और ट्रस्ट के पदाधिकारी की भूमिका सामने नहीं आई।
इसके साथ ही राम मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए नए सिरे से व्यापक समीक्षा करने पर भी सहमति बनी। बैठक की अध्यक्षता ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने की। बैठक में कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि, जगद्गुरु विश्वप्रसन्नतीर्थ, जगद्गुरु वासुदेवानंद सरस्वती, डॉ. कृष्ण मोहन, युगपुरुष परमानंद, महंत दिनेंद्र दास तथा पदेन सदस्य एवं अयोध्या के जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी उपस्थित रहे। वरिष्ठ ट्रस्टी के. परासरण तथा केंद्र और राज्य सरकार के प्रतिनिधि ऑनलाइन माध्यम से बैठक में शामिल हुए।