राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे, अब ट्रस्ट में नई जिम्मेदारी
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में नए न्यासी के रूप में शामिल किए गए महेश भागचंदका लंबे समय से राम मंदिर और हिंदू धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। 68 वर्षीय भागचंदका नई दिल्ली के व्यवसायी और समाजसेवी हैं। उन्होंने स्नातक तक शिक्षा प्राप्त की है। भागचंदका ‘हिंदुत्व के पुरोधा’ पुस्तक के लेखक भी हैं। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के भूमि-पूजन और प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रमों में उन्होंने यजमान के रूप में अनुष्ठानों में सहभागिता की थी। यानी मंदिर निर्माण की महत्वपूर्ण धार्मिक प्रक्रियाओं से उनका सीधा जुड़ाव रहा है।
इसके अलावा वह श्रीराम वन गमन यात्रा से जुड़े 292 पवित्र तीर्थस्थलों पर श्रीराम स्तंभ की स्थापना से जुड़ी गतिविधियों में भी सहभागी रहे हैं। इससे उनके धार्मिक-सांस्कृतिक क्षेत्र में सक्रिय योगदान का परिचय मिलता है। भागचंदका वर्ल्ड हिंदू इकनॉमिक फोरम की कार्यकारिणी के सदस्य भी हैं।
29 साल तक रामलला की ओर से की अदालत में पैरवी
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नए न्यासी मदन मोहन पांडेय का राम जन्मभूमि मामले से करीब तीन दशक पुराना सीधा जुड़ाव रहा है। विधि स्नातक और 74 वर्षीय पांडेय शहर के रिकाबगंज के रहने वाले हैं और पेशे से अधिवक्ता हैं। राम जन्मभूमि विवाद के लंबे कानूनी संघर्ष के दौरान उन्होंने 1990 से 2019 तक उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में श्रीरामलला विराजमान तथा महंत रामचंद्र परमहंस दास की ओर से पैरवी की।
इस लिहाज से मंदिर निर्माण से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण कानूनी अध्यायों के वह प्रत्यक्ष साक्षी और सहभागी रहे हैं। पांडेय उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त महाधिवक्ता की जिम्मेदारी भी छह वर्ष तक संभाल चुके हैं। कानूनी क्षेत्र के अलावा वह श्री हरि सत्संग समिति के उपाध्यक्ष हैं और अयोध्या में कथाकार योजना प्रशिक्षण केंद्र के पालक की भूमिका भी निभा रहे हैं।
शिक्षा जगत से राम मंदिर ट्रस्ट तक
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नए स्वरूप में डॉ. निर्मला यादव का शामिल होना सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक है। शिकोहाबाद की रहने वाली 66 वर्षीय डॉ. यादव शिक्षा जगत से लंबे समय तक जुड़ी रही हैं। वह हिंदी और संस्कृत में परास्नातक तथा पीएचडी हैं। डॉ. यादव ने 19 वर्ष तक महाविद्यालय की प्राचार्या के रूप में जिम्मेदारी संभाली और अब सेवानिवृत्त हैं। शिक्षा प्रशासन और संस्थागत संचालन का उनका लंबा अनुभव रहा है। उन्होंने पीएचडी शोध प्रबंधों तथा एमए की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का कार्य भी किया है। इसके अलावा 15 वर्षों तक विश्वविद्यालय परिषद की सदस्य के रूप में उन्होंने उच्च शिक्षा से जुड़े निर्णयों और अकादमिक प्रशासन में भूमिका निभाई।
उनकी नियुक्ति का सबसे बड़ा महत्व यह है कि ट्रस्ट के गठन के बाद पहली बार किसी महिला को न्यासी के रूप में स्थान मिला है। इसके साथ डॉ. यादव की हिंदी-संस्कृत की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी राम मंदिर के धार्मिक और सांस्कृतिक परिवेश से जुड़ती है।
जो जिम्मेदारी मिलेगी, सेवा भाव से निभाएंगे
अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में शामिल किए गए मदन मोहन पांडेय ने कहा कि ट्रस्ट की ओर से जो भी जिम्मेदारी दी जाएगी, उसे वह सेवा भाव से निभाएंगे। वरिष्ठ अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय को राष्ट्रीय सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है। राम मंदिर से जुड़े अदालती संघर्ष को याद करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि के पक्ष में फैसला सुनाया।
इससे पहले हाईकोर्ट में भी राम जन्मभूमि पक्ष की जीत हुई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने भूमि का एक-तिहाई हिस्सा अन्य पक्षों को भी दिया था। इसके खिलाफ चुनौती दी गई थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने पूरा विवादित परिसर रामलला के पक्ष में देने का फैसला किया। मंदिर में चढ़ावे की रकम में चोरी के मामले पर उन्होंने कहा कि इस मामले से उनका कोई लेना-देना नहीं है।