सैन्य अनुशासन से मंदिर प्रबंधन तक
राम मंदिर के पहले सीईओ के रूप में मिश्रा की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब मंदिर निर्माण के चरण से आगे बढ़कर व्यवस्थित संचालन और व्यापक धार्मिक-पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए दर्शन व्यवस्था, सुरक्षा, कर्मचारी प्रबंधन, श्रद्धालु सुविधाओं का विस्तार और विभिन्न विभागों व एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय जैसी चुनौतियां महत्वपूर्ण होंगी।
भोपतपुरा से अयोध्या तक नया अध्याय
देवरिया के छोटे से गांव भोपतपुरा से निकलकर भारतीय वायुसेना के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचने वाले एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के करियर में अब एक नया अध्याय जुड़ गया है। देश-दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र राम मंदिर के पहले सीईओ के रूप में अब उनके सामने एक विशाल और चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी है।
राम मंदिर के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह नियुक्ति?
अयोध्या के तेजी से विकसित होते इंफ्रास्ट्रक्चर के बीच मंदिर प्रबंधन को भी लगातार नए स्तर पर ले जाने की जरूरत है। ऐसे में सीईओ की भूमिका केवल प्रशासन चलाने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि एक बड़े संस्थान को प्रोफेशनल मैनेजमेंट सिस्टम के साथ आगे बढ़ाने की चुनौती भी होगी। एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के सामने अब कोई दुश्मन देश नहीं, बल्कि एक अलग तरह का मिशन है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े राम मंदिर को ऐसी व्यवस्थाओं से जोड़ना, जहां अनुशासन, तकनीक, सुरक्षा और श्रद्धालु सुविधा एक साथ दिखाई दें।
सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित हैं जितेंद्र मिश्र
ट्रस्ट के अनुसार जितेंद्र मिश्र ने भारतीय वायुसेना में विभिन्न विभागों में 39 वर्ष तक सेवा की है और उन्हें लंबे नेतृत्व अनुभव के साथ सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया गया है। ट्रस्ट ने दावा किया कि गत वर्ष का सफल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भी उनके नेतृत्व और मार्गदर्शन में संपन्न हुआ था। सीईओ चयन के लिए गठित समिति ने करीब साढ़े पांच हजार आवेदनों की जांच और सैकड़ों अभ्यर्थियों के साक्षात्कार के बाद अपनी अनुशंसा ट्रस्ट को सौंपी थी।
जिसमें तीन नामों का पैनल सौँपा गया था उसमें एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा, मेजर जनरल संजय प्रताप सिंह और श्रुति भारद्वाज का नाम था। ट्रस्टियों ने एयर मार्शल के नाम पर बहुमत से मुहर लगाई। ट्रस्ट चयन समिति के सदस्य सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी, सुरेश हावड़े और समिति के सचिव समीर पंडा के प्रति आभार जताया।