रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रस्ट के प्रतिनिधि के रूप में डॉ. अनिल मिश्रा ने बैंक के साथ मिलकर दिशा-निर्देश जारी किए थे। एसओपी लागू होने के बाद उसके अनुपालन की समीक्षा और निगरानी सुनिश्चित करना उनकी जिम्मेदारी थी। एसआईटी के अनुसार सतत पर्यवेक्षण और अनुश्रवण में कमी दिखाई दी। वहीं, गणना कक्ष प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव को सुरक्षा व्यवस्था लागू कराने के लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार माना गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नियमित तलाशी सुनिश्चित नहीं होने से कथित चोरी की घटनाओं को रोकने में विफलता रही।
रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव की भूमिका भी जांच के दायरे में
रिपोर्ट के अनुसार रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास मंदिर परिसर की विभिन्न हुंडियों की चाबियां थीं, जबकि इसके लिए कोई औपचारिक या लिखित प्राधिकरण नहीं मिला। एसआईटी ने इसे गंभीर प्रशासनिक चूक माना है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि उन्होंने अपने रिश्तेदार मनीष कुमार यादव की गणना ड्यूटी में सिफारिश की, जिससे उसे कथित गबन का अवसर मिला। एसआईटी ने यह भी कहा कि यदि गणना के दौरान सीसीटीवी फुटेज की प्रभावी निगरानी होती तो इन घटनाओं को रोका जा सकता था। ऑडिट रिपोर्ट में 180 दिन तक सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने की सिफारिश के बावजूद केवल 45 दिन का बैकअप रखा जा रहा था।
एसआईटी के अनुसार बैंक की ओर से गणना कर्मियों को निर्धारित वेशभूषा उपलब्ध नहीं कराई गई। बैंक प्रतिनिधि गणना के दौरान मौजूद रहे, लेकिन निगरानी प्रभावी नहीं रही। अधिकारियों के मासिक रोटेशन का भी पालन नहीं किया गया। रिपोर्ट में बैंक स्तर पर भी एसओपी के पालन में कमी की बात कही गई है।
जांच अभी जारी
एसआईटी ने स्पष्ट किया है कि यह प्रारंभिक जांच रिपोर्ट है, जांच अभी जारी है। अंतिम रिपोर्ट में पर्यवेक्षणीय विफलताओं, प्रशासनिक जवाबदेही, संस्थागत खामियों तथा सुधारात्मक उपायों पर विस्तृत निष्कर्ष और सिफारिशें प्रस्तुत की जाएंगी।