ट्रस्ट ने बड़ा संदेश देने का प्रयास किया
ट्रस्ट ने एफआईआर दर्ज कराकर बड़ा संदेश देने का प्रयास किया है। यह मामला छह जून को पहली बार प्रकाश में आया था। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए प्रदेश सरकार ने एसआईटी का गठन किया था। 20वें दिन राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से रिपोर्ट दर्ज कराए जाने के कदम को मामले की निष्पक्ष जांच और तथ्यों को सामने लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के आधार पर एफआईआर दर्ज कराई गई है, जबकि अब सभी की निगाहें एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि अंतिम रिपोर्ट में जिम्मेदार व्यक्तियों, वित्तीय प्रक्रियाओं और कथित अनियमितताओं की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकती है।
रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई तय होगी। एसआईटी की प्रारंभिक जांच में वित्तीय लेनदेन और चढ़ावा व्यवस्था से जुड़े बिंदुओं पर सवाल उठे थे। इसके बाद ट्रस्ट ने कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेते हुए एफआईआर दर्ज कराई।
इससे यह संदेश गया है कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी जांच से कोई परहेज नहीं किया जाएगा। मामला सामने आने के बाद पिछले कई दिनों से अयोध्या में चर्चाओं और अटकलों का दौर जारी था। विपक्षी दलों, संत समाज और विभिन्न संगठनों की ओर से भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही थी। ऐसे माहौल में एफआईआर दर्ज होने को जांच प्रक्रिया को महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
अयोध्यावासी बोले- अब सच्चाई सामने आने का रास्ता खुला
राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में एफआईआर दर्ज होने के बाद अयोध्या के विभिन्न वर्गों ने इस कदम का स्वागत किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भगवान राम के मंदिर से जुड़े किसी भी मामले में पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। महंत विवेक आचारी ने कहा कि एफआईआर राम मंदिर ट्रस्ट को पहले ही करा देना चाहिए था।
जांच आगे बढ़ने और एफआईआर दर्ज होने से सच्चाई सामने आने का रास्ता खुला है। महंत डॉ़ देवेशाचार्य ने उम्मीद जताई कि एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद पूरे प्रकरण से पर्दा उठेगा और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी, जबकि निर्दोष लोगों की स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी। व्यापारी पंकज गुप्ता ने कहा कि ट्रस्ट ने सही निर्णय लिया है। जो भी दोषी हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाना चाहिए, ताकि पूरी दुनिया को एक संदेश जाए।