राम दरबार सजने की प्रतीक्षा में 500 साल बीत गए। अब श्रीरामजन्मभूमि पर रामलला का भव्य मंदिर आकार ले चुका है। रामराज का नया अध्याय अब साकार दिखने लगा है।
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ध्वजारोहण के लिए सज कर तैयार राममंदिर का परिसर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रामनगरी में ध्वजारोहण का उल्लास छलकने लगा है। शहर में उत्सव का माहौल है, ध्वज, पताकाएं, पुष्पों से मार्ग सज रहे हैं। जिस अयोध्या ने त्रेतायुग में प्रभु श्रीराम ने 14 वर्ष के वनवास का दर्द सहा था, उसी रामनगरी ने कलियुग में यह विरह लगभग 500 वर्ष तक झेला।
राम दरबार सजने की प्रतीक्षा में 500 साल बीत गए। यह दर्द दिया था रामकोट मोहल्ले में एक टीले पर वर्ष 1528 से 1530 में बनी मस्जिद पर लगे शिलालेख ने, जिस पर लिखा था कि बाबर के आदेश पर उसके सेनापति मीर बाकी ने इसे बनवाया था।
संत समाज मान रहा है कि अब जब श्रीरामजन्मभूमि पर रामलला का भव्य मंदिर आकार ले चुका है, तो यह वही आनंद है जो त्रेतायुग में श्रीराम के लौटने पर अयोध्यावासियों को मिला था। रामराज का नया अध्याय अब साकार दिखने लगा है।
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राममंदिर परिसर में लगाई गई कुर्सियां व राममंदिर का विहंगम दृश्य
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
यह प्रतीक्षा केवल भूमि की नहीं, बल्कि करोड़ों रामभक्तों की आस्था की प्रतीक्षा थी। कलियुग में मिली यह त्रेतायुग जैसी खुशी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृढ़ संकल्प शक्ति से संभव हुई है। रामलला का मंदिर भारत की आत्मा का पुनर्जागरण है। ध्वजारोहण समारोह धर्म, सत्य और मर्यादा की विजय का घोष है।- महंत गिरीश दास
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ध्वजारोहण कार्यक्रम को लेकर सजा राम मंदिर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अयोध्या ने 500 वर्षों का वनवास सहा है। जैसे राम वन से लौटकर मर्यादा पुरुषोत्तम बनकर आए थे, वैसे ही सदियों बाद यह धरती फिर धर्म और न्याय की विजय का साक्षी बनी है। आज का उत्साह त्रेतायुग की स्मृति को जीवंत कर रहा है। यह सिर्फ राम मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण नहीं रामराज की घोषणा है।- महंत डॉ. भरत दास
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ध्वजारोहण कार्यक्रम को लेकर सजा राम मंदिर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रामनगरी की आंखों में आज जो चमक है, वह 500 साल के विरह के बाद मिला सुख है। मंदिर की पूर्णता घोषित करने वाला ध्वजारोहण समारोह का यह क्षण बताता है कि सत्य और धर्म भले विलंबित हों, पर विजयी अवश्य होते हैं। यह अयोध्या का पुनर्जन्म है। यह समारोह विश्व को संदेश देगा कि राम का मार्ग ही मानवता का मार्ग है।- महंत राम दास
ध्वजारोहण कार्यक्रम को लेकर सजा राम मंदिर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
न्याय की स्थापना करेगा ध्वजारोहण समारोह
रामनगरी के शिखर पर जो ध्वज फहराने जा रहा है, है, उसकी लंबाई-चौड़ाई यूं ही नहीं तय हुई है। अंक ज्योतिष की गणना में इसके मायने समझ में आते हैं। ध्वज का आकार 22 गुणे 11 फीट है। इसको गुणा करने पर 242 का अंक आता है, जिसका गुणांक आठ है। आठ को न्याय के देवता शनि का अंक माना जाता है। यह कहा जा सकता है कि राम मंदिर के शिखर यानी अयोध्या में अब न्यायाधीश के रूप में भगवान विराजमान हो चुके हैं। जो मर्यादा में रहेगा सुखी रहेगा, जो मर्यादा विहीन आचरण करेगा उसका रावण जैसा हश्र होगा।- महंत विवेक आचारी