अयोध्या। चोरी के मामले में जिला कारागार में निरुद्ध बंदी दीपक उर्फ दीपू बृहस्पतिवार को कचहरी परिसर से पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। उसे अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम प्रिया सक्सेना की अदालत में रिमांड के लिए दोपहर करीब 12 बजे लाया गया था।
अदालत में पेश किए जाने के दौरान वह कटघरे से पुलिसकर्मी को चकमा देकर निकल गया। बंदी के फरार होने की सूचना मिलते ही कचहरी परिसर में अफरातफरी मच गई। पुलिस ने तत्काल उसकी तलाश शुरू कर दी, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उसका सुराग नहीं लग सका था।
दीपक उर्फ दीपू को थाना कैंट क्षेत्र में नौ जून को टावर से तार चोरी के मामले में गिरफ्तार किया गया था। मऊशिवाला चौकी क्षेत्र में टावर से लगातार तार चोरी की शिकायतों के बाद संबंधित कंपनी की ओर से कैंट थाने में रिपोर्ट दर्ज कराया गया था। थानाध्यक्ष संदीप सिंह ने कार्रवाई करते हुए दीपक को गिरफ्तार कर 10 जून को न्यायालय के माध्यम से जेल भेजा था। दीपक थाना कोतवाली अयोध्या क्षेत्र के दर्शननगर स्थित बिजुलियाडीह का रहने वाला है।
सातों गेट पर जांच, सीसीटीवी खंगाले
बंदी के भागने की सूचना मिलते ही कचहरी परिसर के सभी सातों गेटों पर सघन चेकिंग अभियान शुरू कर दिया गया। एसपी सिटी चक्रपाणि त्रिपाठी और सीओ सिटी श्रेयश त्रिपाठी ने मौके पर पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। इसके साथ ही रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और शहर के प्रमुख चौराहों पर लगे कैमरों की फुटेज भी जांचने के निर्देश दिए गए हैं। सीओ सिटी के नेतृत्व में पुलिस की कई टीमें गठित कर संभावित ठिकानों पर तलाश शुरू कराई गई है।
बंदी के फरार होने के बाद पुलिस ने विभिन्न थाना क्षेत्रों को उसकी फोटो भेजकर तलाश में मदद मांगी है। उसके रिश्तेदारों को भी घटना की जानकारी देकर दीपक के बारे में कोई सूचना मिलने पर तत्काल पुलिस को बताने के लिए कहा गया है। वहीं जिला कारागार से पिछले दो महीने में दीपक से मिलने वालों की सूची भी मांगी गई है। सूत्रों के अनुसार उसकी बहन और जीजा गुजरात में रहते हैं और वह घर में अकेला रहता था। उसके घर को बेचने की चर्चा होने की बात भी सामने आई है, जिसकी पुलिस जांच कर रही है।
दीपक पर तीन मामले दर्ज
पुलिस के अनुसार दीपक कुमार के खिलाफ पूराकलंदर और कैंट थाना क्षेत्र में चोरी के दो मामले दर्ज हैं। वहीं अयोध्या कोतवाली क्षेत्र में वर्ष 2025 में एनडीपीएस एक्ट के तहत भी मामला दर्ज हुआ था। टीम के अलावा दीपक की गिरफ्तारी करने वाली कैंट थाने की टीम, जिसमें थानाध्यक्ष संदीप सिंह और मऊशिवाला चौकी प्रभारी आशू प्रताप सिंह शामिल हैं, को भी उसकी तलाश में लगाया गया है। घटना की गंभीरता को देखते हुए जनपद न्यायाधीश रणंजय कुमार वर्मा ने अधिकारियों के साथ बैठक कर कचहरी की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। परिसर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
पहले भी हो चुके हैं बंदियों के फरार होने के मामले
अयोध्या कचहरी से बंदी के फरार होने का यह पहला मामला नहीं है। वर्ष 2019 में हत्या के आरोपी विनय मौर्य उर्फ कुन्नू को पेशी के लिए जेल से कचहरी लाया गया था। गिनती के दौरान उसके फरार होने का पता चला था और बाद में उसे महाराजगंज क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। वहीं जनवरी 2026 में जिला जेल से शेर अली और गोलू अग्रहरि बैरक से निकलकर बाउंड्री पार कर फरार हो गए थे। मामले में जेल प्रशासन के कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर निलंबन की कार्रवाई हुई थी। दोनों बंदियों का अब तक पता नहीं चल सका है।