अयोध्या। दलालों के जाल में फंसकर भोले-भाले मरीज सस्ते और अच्छे इलाज के झांसे में आकर आये दिन जान गंवा रहे हैं। अपनों को खोने के बाद कुछ दिन तक तीमारदार भावुकता में आकर लड़ाई लड़ते हैं। बाद में सिस्टम की झंझावतों से थक-हारकर वह भी या तो समझौता कर लेते हैं या घर बैठ जाते हैं। लंबे समय से जिले के गली-कूचे में खुले छोटे-छोटे नर्सिंग होमों में मौत का ऐसा ही खेल हो रहा है, लेकिन विभाग ठोस कदम नहीं उठा रहा है।
सीएमओ के अधीन जिले में लगभग 184 नर्सिंग होम और क्लीनिक पंजीकृत हैं। इनमें अधिकांश नर्सिंग होम गली-कूचे में खुले हैं, जहां मरीज स्वत: पहुंच नहीं पाता है। इसके लिए उनके दलाल सरकारी अस्पतालों में जमा होते हैं। वह सरकारी अस्पतालों की खामियां गिनाकर व नर्सिंग होम में कम पैसे में बेहतर इलाज का झांसा देकर मरीजों को बरगला लेते हैं। नर्सिंग होम तक पहुंचाकर उनसे अपना कमीशन लेकर रफू चक्कर हो जाते हैं। इन अस्पतालों में सिर्फ सिजेरियन प्रसव या अन्य ऑपरेशन संबंधी इलाज ही प्राथमिकता होती है।
परिजनों को तमाम जोखिम बताकर उन्हें ऑपरेशन के लिए राजी कर लेते हैं। तमाम तरह के आश्वासन और सांत्वना देकर उनसे सहमति पत्र भी भरा लेते हैं। फिर किसी भी डॉक्टर को ऑन काॅल बुलाकर ऑपरेशन करवा देते हैं। ऑपरेशन करने वाला डॉक्टर भी मरीज से ओटी में पहली बार मिलता है। गर्भधारण के दौरान प्रसूता के शरीर की जटिलताओं से भी अनजान होता है।
ऑपरेशन करके अपना हिस्सा लेकर वह भी गायब हो जाता है। इसके बाद मरीज की देखभाल की पूरी जिम्मेदारी अस्पताल के अकुशल स्वास्थ्यकर्मियों के हवाले हो जाती है। बाद में ऑपरेशन संबंधी अन्य जटिलताएं बढ़ने पर समय पर विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हो पाते हैं। हालत गंभीर होने पर मरीजों की मौत हो जाती है। ऐसे ही मामले जिले में समय-समय पर आते रहे हैं, लेकिन इन पर अंकुश नहीं लग सका। इन अस्पतालों के खिलाफ कोई अभियान भी नहीं चला। बस, शिकायत मिलने पर कागजों का पेट भर दिया गया। नतीजतन बेखौफ अस्पताल संचालक मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ करने से बाज नहीं आ रहे हैं।
जिले में हो चुकी घटनाओं पर एक नजर
फिजीशियन ने कर दिया ऑपरेशन : शहर के नाका दुर्गापुरी स्थित एक नर्सिंग होम में दो अक्तूबर, 2022 को उसरु अमौना निवासी गीता कनौजिया का सिजेरियन हुआ। महिला ने मृत नवजात को जन्म दिया। कुछ समय बाद महिला ने भी दम तोड़ दिया। परिजनों ने हंगामा किया और मीडिया ट्रॉयल हुआ तो पता चला कि अस्पताल ऑपरेशन करने की तिथि में अवैध था। जिस डॉक्टर ने ऑपरेशन किया, वह अपने ही अस्पताल में बतौर फिजीशियन दर्ज था। अस्पताल उस समय सील हुआ, बाद में फिर से संचालित होने लगा।
महिला की मौत, पुलिस ने कराया समझौता : मई, 2022 में कुड़वार सुल्तानपुर निवासी तमन्ना (22) को मायके वालों ने दर्शन नगर स्थित एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया। बाहर से आकर एक डॉक्टर ने उसका ऑपरेशन कर दिया। बाद में महिला की मौत हो गई। परिजनों ने पुलिस से शिकायत की तो सुलह-समझौता करा दिया गया।
प्रसव के बाद महिला ने तोड़ा दम, संचालक फरार : जुलाई, 2022 में भिटौरा निवासी मुस्कान (30) को परिजन सीएचसी रुदौली ले गए। वहां डॉक्टर ने खैरनपुर स्थित निजी अस्पताल भेज दिया। वहां महिला के जुड़वा बच्चे पैदा हुए और 50,000 रुपये जमा कराए गए। बाद में महिला की मौत हो गई। परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा काटना शुरू किया तो संचालक फरार हो गया।
यदि कोई अस्पताल बाहर से इमरजेंसी में किसी चिकित्सक को बुलाता है तो उसकी सूचना सीएमओ को देना जरूरी है। यदि कोई अस्पताल बगैर किसी सूचना के इंपैनल चिकित्सक के अलावा किसी दूसरे से ऑपरेशन करवाता है तो गलत है। ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी। -डॉ. सुशील प्रकाश, अपर निदेशक, अयोध्या मंडल