अयोध्या के अवध विश्वविद्यालय में विकसित भारत-2047 और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित हुई। वक्ताओं ने समावेशी और आत्मनिर्भर समाज के लिए उनके सिद्धांतों के महत्व को रेखांकित किया।
अयोध्या। अवध विश्वविद्यालय के संत कबीर सभागार में पं. दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ और अर्थशास्त्र एवं ग्रामीण विकास विभाग के सहयोग से विकसित भारत-2047 एवं पं. दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानववाद दर्शन विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई। अध्यक्षता करते हुए विवि के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि भारत सही मायने में तब भारत विकसित बन पाएगा, जब अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति का उद्धार होगा। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पंडित जी के सिद्धांतों का अनुसरण करना होगा।
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मुख्य वक्ता पूर्व कुलपति बीबीएयू लखनऊ प्रो. एनएनपी वर्मा ने कहा कि केंद्र व प्रदेश की सरकार ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के सिद्धांतों से प्रेरणा लेकर जो योजनाएं लागू की हैं, उनसे गरीबों, किसानों, महिलाओं का सर्वांगीण विकास होगा। संयोजक प्रो. आशुतोष सिन्हा ने कहा कि विकसित भारत 2047 का उद्देश्य समावेशी व आत्मनिर्भर समाज का निर्माण है। धन्यवाद ज्ञापन प्रो. विनोद कुमार श्रीवास्तव ने किया। इस मौके पर डॉ. सरिता द्विवेदी, डॉ. अलका श्रीवास्तव, डॉ. रीमा सिंह, प्रो. संत शरण मिश्र, प्रो. सुधीर कुमार श्रीवास्तव, प्रो. शैलेंद्र कुमार, डॉ प्रतिभा सिंह, डॉ सौम्या, डॉ. रचना श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।