अयोध्या। पाकिस्तान के 33 शहरों के 223 श्रद्धालुओं ने अयोध्या पहुंचकर रामलला के दरबार में हाजिरी लगाई। हाथ में भगवा ध्वज, जय श्रीराम के नारे लगाते रामलला के दरबार में जब पाक श्रद्धालु पहुंचे तो अधिकांश भावविभोर हो उठे। दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने बताया कि रामलला से प्रार्थना की है कि भारत व पाकिस्तान के रिश्ते जल्द से जल्द बेहतर हों। साथ ही श्रद्धालुओं ने पीएम मोदी से मांग किया कि वीजा और पासपोर्ट की प्रक्रिया सरल की जाए ताकि भारत आना आसान हो सके।
श्रद्धालु दो अलग-अलग जत्थों में शुक्रवार को रामनगरी पहुंचे और सुबह सरयू स्नान कर रामलला सहित विभिन्न मंदिरों में दर्शन-पूजन किया। अयोध्या की धार्मिकता से सभी श्रद्धालु बहुत ही प्रभावित नजर आए। जत्थे का नेतृत्व कर रहे सदाणी दरबार के मुखिया साईं डॉ़ युधिष्ठिर लाल ने बताया कि इस यात्रा का नाम सदाणी दरबार हिंदू तीर्थ यात्रा है। यात्रा का शुभारंभ वर्ष 1984 में हुआ था। यह यात्रा दोनों देशों के बीच में सद्भावना के सेतु की भूमिका निभाती है। श्रद्धालुओं का यह जत्था पाक से सबसे पहले छत्तीसगढ़ के रायपुर पहुंचा। वहां से अमरावती, प्रयागराज होते हुए अयोध्या पहुंचे हैं। यात्रा का अंतिम पड़ाव हरिद्वार होगा।
उन्होंने बताया कि हर वर्ष पाकिस्तान से श्रद्धालु आते हैं। एक महीने का वीजा रहता है। सबसे पहले छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित सदाणी दरबार आते हैं। हर वर्ष तीन-चार तीर्थों की यात्रा कराते हैं। चारों धाम की यात्रा करा चुके हैं। वैष्णो देवी व तिरुपति बालाजी भी जा चुके हैं। पहली बार अयोध्या पहुंचे पाक श्रद्धालुओं का सिंधी समाज की ओर से स्वागत किया गया। विहिप नेता गजेंद्र सिंह के निर्देशन में सभी श्रद्धालुओं को रामलला के दर्शन कराए गए। राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से श्रद्धालुओं को प्रसाद दिया गया।
फिर शुरू हो लाहौर से दिल्ली तक समझौता एक्सप्रेस
डॉ़ युधिष्ठिर लाल कहा कि पाकिस्तान में धार्मिक कार्यक्रम की उतनी आजादी नहीं रहती, इसलिए भारत में धार्मिक यात्रा का हिस्सा बनकर श्रद्धालु काफी खुश होते हैं। पहले लाहौर से दिल्ली तक समझौता एक्सप्रेस ट्रेन चलती थी, जिसे कुछ साल पहले बंद कर दिया गया। श्रद्धालुओं की इच्छा है कि ट्रेन सेवा शुरू की जाए, जिससे पाकिस्तान से भारत आना आसान हो सके। कहा कि जिस तरह से सदियों के संघर्ष के बाद अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हुआ है, उसी तरह सिंध प्रांत भी एक दिन भारत का हिस्सा बनेगा।
पाकिस्तानी पत्रकार ज्योति श्री माहेश्वरी ने बताया कि अयोध्या में जब रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हो रही थी तो हमारे आंखों से आंसू गिर रहे थे। हम सभी इस क्षण के साक्षी बनना चाहते थे, लेकिन सीमाओं के बंधन के चलते नहीं आ सके। हम भारत सरकार के शुक्रगुजार हैं, हमें अयोध्या आने का मौका मिला।
सिंध प्रांत निवासी धनराज ने बताया कि वे 35 सालों से बेकरी चलाते हैं। पाकिस्तान में लोगों को धर्म-संस्कृति से जोड़ने की जरूरत है। वहां अल्पसंख्यकों को ऐसी कोई दिक्कत नहीं है, जिससे उन्हें पाकिस्तान छोड़कर किसी अन्य देश में जाना पड़े।
सेवानिवृत्त मेडिकल अफसर डॉ़ प्रहलाद का कहना है कि उत्तर सिंध में ज्यादा दिक्कतें हैं। भारत के मुकाबले वहां अच्छा माहौल नहीं है। भारत आकर हमें ऐसा लग रहा है कि जैसे हम अपनों के घर आए हैं। भारतीयों ने बहुत प्यार दिया है, यहां की सरकार ने बहुत अच्छा स्वागत और सम्मान किया है, हम बार-बार अयोध्या आना चाहते हैं।
व्यवसायी संदीप कुमार ने कहा कि हमारे यहां शाम सात बजे दुकानें बंद हो जाती हैं। महिलाएं अकेले नहीं निकल सकती हैं। पर्व व त्योहार मनाने पर रोक नहीं है, लेकिन बड़ा कार्यक्रम नहीं किया जा सकता है। आपराधिक घटनाएं बहुत होती हैं। भारत में हमने देखा कि सभी स्वतंत्र हैं, ऐसा माहौल हमारे देश में हो तो कितना अच्छा होगा।
प्रयागराज में 16 घंटे फंसा रहा श्रद्धालुओं का एक जत्था
पाकिस्तान से आए श्रद्धालुओं का एक जत्था प्रयागराज में 16 घंटे फंसा रहा। अयोध्या सिंधी समाज के प्रवक्ता ओम प्रकाश ओमी ने बताया कि प्रयागराज में 47 श्रद्धालुओं के जत्थे को रोक दिया गया। जत्थे में शामिल एक श्रद्धालु अजीत कुमार के वीजा में पिता का नाम गलत मुद्रित है, जबकि पासपोर्ट में सही है। इसी तकनीकी दिक्कत के चलते पूरे जत्थे को रोक दिया गया। प्रयागराज प्रशासन की ओर से सभी श्रद्धालुओं के वीजा व आईडी की जांच की जा रही है। करीब 16 घंटे बाद शुक्रवार शाम छह बजे श्रद्धालु प्रयागराज से अयोध्या के लिए रवाना हुए और देर रात पहुंचे।