अयोध्या। डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है। अब असिस्टेंट प्राेफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसरों को परास्नातक के साथ स्नातक पाठ्यक्रमों की कक्षाएं भी लेनी होंगी। इतना ही नहीं सभी नियमित शिक्षक स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को भी पढ़ाएंगे। इसके लिए राजभवन की पहल पर कुलपति ने कला, विज्ञान व वाणिज्य संकायाध्यक्षों को टाइम टेबल तैयार करने का दायित्व सौंप दिया है।
अभी तक स्नातक के साथ स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों की कक्षाएं लेने की जिम्मेदारी सिर्फ संविदा शिक्षक और अतिथि प्रवक्ता निभाते थे। असिस्टेंट प्राेफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के पदों पर कार्यरत नियमित शिक्षक आमतौर पर परास्नातक के छात्र-छात्राओं की ही कक्षाएं लेते हैं। अब आने वाले समय में ऐसा नहीं चल पाएगा। नियमित शिक्षकों को परास्नातक के अलावा स्नातक और स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को भी पढ़ाना होगा।
प्रदेश की राज्यपाल और राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने इस दिशा में पहल की है। कुलाधिपति की मंशा से एक दिन पहले विश्वविद्यालय के दौरे पर आए उनके विशेष कार्याधिकारी अशोक देसाई और डॉ. पंकज एल जानी ने कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह को अवगत कराया। कुलपति ने अब इस दिशा में होमवर्क शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में विश्वविद्यालय में पठन-पाठन का टाइम टेबल तैयार करने का दायित्व कला संकायाध्यक्ष प्रो. आशुतोष सिन्हा, विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो. संत शरण मिश्र और वाणिज्य संकायाध्यक्ष प्रो. शैलेंद्र कुमार वर्मा को सौंपा है।
तीनों संकायाध्यक्ष राजभवन और कुलपति के निर्देश पर टाइम टेबल का प्रारूप तैयार करने में जुट गए हैं। इसमें सभी विभागाध्यक्षों का भी सहयोग लिया जा रहा है। टाइम टेबल तैयार हो जाने पर नियमित शिक्षकों को यूजी और पीजी के साथ स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों की कक्षाएं लेने में सहुलियत होगी। क्लास की टाइमिंग आपस में टकराने की संभावना नहीं रह जाएगी। इसके साथ ही विभिन्न शैक्षणिक भवनों में कमरों की संख्या कम होने के बाद भी कक्षा संचालन में कोई बाधा नहीं आने पाएगी।