04- हनुमानगढ़ी के पास स्थित भेाग प्रसाद की दुकान- संवाद
अयोध्या। रामनगरी में रसोई गैस सिलिंडरों की किल्लत का असर अब प्रसाद निर्माण से जुड़े कारोबार पर भी दिखाई देने लगा है। गैस की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण कई स्थानों पर भोग-प्रसाद तैयार करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। मंदिरों में चढ़ने वाले लड्डू, पेड़ा और अन्य प्रसाद का बड़े पैमाने पर निर्माण होता है। इसके लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में गैस सिलिंडरों का उपयोग किया जाता है। आपूर्ति में आ रही कमी के चलते अब कुछ स्थानों पर प्रसाद तैयार करने के लिए पारंपरिक लकड़ी की भट्ठी का सहारा लेने की तैयारी हो रही है।
सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी में रोजाना एक लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन को पहुंचते हैं। यहां हनुमंतलला को लड्डू प्रसाद चढ़ाने की परंपरा है। कुछ श्रद्धालु पेड़ा भी अर्पित करते हैं। कनक भवन मंदिर में भी भगवान को प्रसाद स्वरूप लड्डू और पेड़ा अर्पित किया जाता है। इसलिए प्रसाद की मांग लगातार बनी रहती है। इसी को देखते हुए प्रसाद निर्माण करने वाले प्रतिष्ठान गैस की कमी के बीच भी उत्पादन बनाए रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं कर रहे हैं।
प्रसाद कारोबार से जुड़े व्यापारी विकास गुप्ता ने बताया कि यदि दो से तीन दिनों में हालात नहीं सुधरे तो समस्या बढ़ जाएगी। अभी हम पुराना स्टॉक बेच रहे हैं, सिलिंडर के अभाव में नया प्रसाद बहुत ही कम मात्रा में बन पा रहा है। अब लकड़ी की भट्ठी पर प्रसाद बनाने की योजना बना रहे हैं। अंशु मोदनवाल ने बताया कि गैस सिलिंडरों की आपूर्ति प्रभावित होने से प्रसाद बनाने में दिक्कत आ रही है। बताया कि कमर्शियल सिलिंडर मिल ही नहीं रहा है, जबकि रसोई गैस की किल्लत भी बढ़ गई है। वहीं व्यापारी शिवनारायण सैनी का कहना है कि अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, इसलिए प्रसाद की मांग भी अधिक रहती है। ऐसे में गैस की नियमित उपलब्धता जरूरी है, ताकि प्रसाद निर्माण सुचारु रूप से चलता रहे।
हनुमानगढ़ी में प्रसाद की कुल दुकानें- 200
रोजाना प्रसाद की खपत- लगभग 10 क्विंटल
प्रसाद के कारोबार से रोजाना आय- लगभग चार लाख