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विधायकों की सदस्यता पर नहीं आई कोई याचिका : महाना

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अयोध्या। उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने समाजवादी पार्टी से निष्कासित तीनों विधायकों के राजनीतिक भविष्य पर कहा कि नियम के मुताबिक कोई भी विधायक पार्टी की मंशा के अनुरूप काम नहीं करता है तो उस पार्टी का अधिकार होता है कि नियम 10 के अंतर्गत अध्यक्ष के समक्ष अपनी याचिका दाखिल करे। याचिका पर निर्णय गुण-दोष के आधार पर होता है। इस प्रकरण में उनके समक्ष सदस्यता के मसले पर कोई याचिका नहीं आई है।
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विधानसभा अध्यक्ष मंगलवार को रामलला के दर्शन करने के अयोध्या पहुंचे। सर्किट हाउस में जनप्रतिनिधियों और भाजपा नेताओं ने उनका स्वागत किया और उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस दौरान संवाददाताओं से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि जब भी विधायक किसी राजनीतिक दल से निष्कासित होते हैं, उनको असंबद्ध रूप से मान्यता मिलती है। अभी कल समाजवादी पार्टी ने तीन विधायकों का निष्कासन किया है, इसकी आधिकारिक सूचना उनके पास नहीं है।

महाना ने कहा कि जो सदस्य निष्कासित हुए हैं, उनको अलग से मान्यता देने के लिए भी किसी प्रकार का कोई भी आवेदन उनके पास नहीं आया है। जब आवेदन आएगा, तब उस पर नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। दरअसल समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गोसाईगंज के विधायक अभय सिंह, गौरीगंज के विधायक राकेश प्रताप सिंह और ऊंचाहार के विधायक मनोज पांडेय को पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण निष्कासित कर दिया है।
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25 जून को आपातकाल के 50 वर्ष पूरे होने पर महाना ने कहा कि इस देश में यह दिन लोकतंत्र के काले अध्याय के रूप में लिखा जा चुका है। लोकतंत्र में तानाशाही के लिए कोई स्थान नहीं है। पूरी दुनिया का सबसे मजबूत और बड़ा लोकतंत्र हमारा ही देश है। संविधान की मंशा के विपरीत जो तानाशाही होती है, वह दिन हमेशा काले अध्याय के रूप में जाना जाता है।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि इस बार उत्तर प्रदेश की विधानसभा सर्वोत्तम विधानसभा के रूप में जानी गई है। पिछले तीन वर्षों में विधायिका का जो सम्मान होना चाहिए था, वह हुआ। इस बात को कहते हुए प्रसन्नता है कि सरकार जो प्रस्ताव लाती है, उस पर विपक्ष चर्चा करने के लिए तैयार रहता है। तीन वर्ष में केवल दो दिन विधानसभा स्थगित हुई। बाकी दिन विधानसभा में बहुत स्वस्थ चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका तीनों का अपना-अपना रोल है। विधायिका की जनता से जो दूरी थी, उसको पुनर्स्थापित करने का संकल्प पूरा हुआ है। जनता बेहतर विधायक चुन रही है। हमारे विधायकों में बहुत से डॉक्टर, इंजीनियर, वित्तीय विशेषज्ञ और लाॅ ग्रेजुएट हैं।
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