अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय और महर्षि महेश योगी रामायण विश्वविद्यालय के बीच शैक्षणिक सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत दोनों विश्वविद्यालय शिक्षा और शोध के क्षेत्र में मिलकर काम करने के साथ नवाचार का आदान-प्रदान करेंगे।
इस एमओयू के माध्यम से दोनों विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परंपरा, शोध कार्य, सांस्कृतिक गतिविधियों और भावातीत ज्ञान से जुड़े कार्यक्रमों को बढ़ावा देंगे। यह सहयोग राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत होगा। इससे दोनों विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों, शिक्षक और शोधार्थियों को शैक्षणिक गतिविधियों में नई सुविधाएं और अवसर मिलेंगे।
इस परस्पर समझौते के तहत दोनो विश्वविद्यालय अपने शिक्षकों, शोधकर्ताओं और प्रशासनिक कर्मचारियों का एक-दूसरे को आदान-प्रदान करेंगे। स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के साथ शोध विद्यार्थियों के लिए सह निर्देशक के रूप में सहयोग किया जाएगा। दोनों विश्वविद्यालय शिक्षण, अनुसंधान और छात्र विकास के लिए शैक्षणिक ज्ञान का आपस में आदान-प्रदान करते रहेंगे।
पूर्व अनुमति के साथ दोनों विश्वविद्यालयों की वेबसाइटों पर शैक्षणिक गतिविधियों का पारस्परिक प्रचार किया जाएगा। शिक्षक विकास और आदान-प्रदान कार्यक्रम आयोजित होंगे। उपलब्धता के अनुसार बुनियादी ढांचे और शैक्षणिक संसाधनों का साझा उपयोग किया जा सकेगा। शिक्षकों और फैकल्टी सदस्यों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय अनुदान एजेंसियों के समक्ष संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं प्रस्तुत की जाएंगी।
अवध विश्वविद्यालय के कुलसचिव विनय कुमार सिंह के अनुसार संस्थागत नीतियों के अनुसार परामर्श परियोजनाओं का संचालन किया जाएगा। छात्रों, कर्मचारियों और शिक्षकों के लिए भावातीत ध्यान और योग के माध्यम से चेतना आधारित शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। दोनों विश्वविद्यालय अब संयुक्त रूप से अंतरराष्ट्रीय योग उत्सव का आयोजन करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा का प्रचार करेंगे।
समूहों में आयोजित होंगे भावातीत ध्यान और योग पाठ्यक्रम
इसी कड़ी में वैदिक विज्ञान, पारंपरिक भारतीय चिकित्सा, प्राचीन गणित और संस्कृत साहित्य में संयुक्त अनुसंधान किया जाएगा। आने वाले समय में संयुक्त गतिविधियों के कार्यान्वयन के लिए गोपनीयता, बौद्धिक संपदा अधिकार और विवाद समाधान सहित पारस्परिक रूप से सहमत शर्तों के साथ अलग-अलग समझौते किए जा सकते हैं। महीने में एक बार भावातीत ध्यान और योग पाठ्यक्रम समूहों में आयोजित किया जाएगा।