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सनातन संस्कृति और लोकआस्था की जीवनरेखा हैं मां सरयू: राजेंद्र दास

Fri, 26 Jun 2026 11:06 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
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सरयू जयंती महोत्सव के दूसरे दिन के कार्यक्रमों का उद्घाटन करते जगद्गुरु राजेंद्र दास
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अयोध्या। राम की पैड़ी स्थित सहस्त्रधारा घाट पर संचालित सरयू जयंती महोत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण रहा। द्वितीय दिवस के उद्घाटन सत्र में मलूकपीठाधीश्वर जगद्गुरु राजेंद्र दास देवाचार्य ने भगवान श्रीराम की मर्यादा और मां सरयू की दिव्य महिमा का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि मां सरयू केवल जलधारा नहीं, बल्कि भारतीय सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और लोकआस्था की जीवनरेखा हैं।
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उन्होंने कहा कि अयोध्या की पहचान श्रीराम और सरयू के अभिन्न संबंध से है। सरयू के तट पर किया गया जप, तप, दान और सत्संग मनुष्य के जीवन को पवित्र और सार्थक बनाता है। भगवान श्रीराम के जीवन से हमें सत्य, सेवा, त्याग और मर्यादा का संदेश मिलता है। रामकथा केवल धार्मिक आख्यान नहीं, बल्कि आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा है। जब समाज राम के आदर्शों और संतों के उपदेशों को आत्मसात करता है, तभी सामाजिक समरसता, नैतिकता और आध्यात्मिक मूल्यों का संवर्धन होता है।

कार्यक्रम के संयोजक आंजनेय सेवा संस्थान विकास समिति के अध्यक्ष महंत शशिकांत दास ने बताया कि महोत्सव के दौरान प्रतिदिन रामकथा, संत प्रवचन और सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया जा रहा है। कहा कि महोत्सव का उद्देश्य मां सरयू के आध्यात्मिक महत्व का प्रचार-प्रसार करने के साथ नई पीढ़ी को सनातन संस्कृति से जोड़ना है। संचालन महंत मनीष दास ने किया। द्वितीय दिवस के उद्घाटन अवसर पर श्रीराम बल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास, विहिप के केंद्रीय संरक्षक दिनेश चंद्र, महंत जनार्दन दास, महंत छविराम दास, महंत प्रशांत शास्त्री, सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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