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वेदों में निहित हैं अनेक वैज्ञानिक तथ्य : प्रो. पुरोहित

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अयोध्या। डा. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के व्यवसाय प्रबंध व उद्यमिता विभाग में रिलिवेंस आफ इंडियन नाॅलेज सिस्टम इन बिजनेस विषय पर आयोजित कार्यशाला के समापन पर विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र वितरित किया गया। दून विश्वविद्यालय के प्रो. एचसी पुरोहित ने प्राचीन वेदों में निहित वैज्ञानिक तथ्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विज्ञानी वेदों में उल्लेखित पृथ्वी की आयु को अब खोज सकते हैं। जबकि वेदों में यह सदियों पहले ही वर्णित था।
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उन्होंने वसुधैव कुटुंबकम के महत्व को समझाते हुए इसे संपूर्ण विश्व के लिए प्रासंगिक बताया। प्रो. अविनाश पाथारडिकर ने कहा कि भारतीय वेदों में उल्लेखित श्लोकों को वैज्ञानिक प्रयोगों में उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने वैज्ञानिक डा. जगदीशचंद्र बसु का उदाहरण दिया। कहा कि प्रो. बसु ने वेदों में लिखे श्लोकों का अध्ययन कर यह सिद्ध किया कि पेड़-पौधों में भी चेतना होती है। यह खोज आधुनिक विज्ञान के लिए मील का पत्थर साबित हुई और अब भी अनुसंधान में इसका व्यापक प्रभाव देखा जा सकता है।

इस्कान से आए देव शेखर विष्णु दास ने विद्यार्थियों को गीता के महत्व की जानकारी दी। कहा कि गीता के अध्ययन से विद्यार्थी किसी भी परिस्थिति में सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित कर सकते हैं। उन्होंने गीता को समस्त वेदों का सार बताया। साथ ही गीता के गहन ज्ञान को जीवन में अपनाने की सीख दी। विभागाध्यक्ष प्रो. हिमांशु शेखर सिंह ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का महत्व जीवन के प्रत्येक पड़ाव पर है। विज्ञान जिन बातों को अब मान रहा है, वेदों, उपनिषदों और पुराणों में वह तथ्य हजारों वर्ष पहले उल्लेखित किए गए थे। इस अवसर पर प्रो. राना रोहित सिंह, डाॅ. महेंद्र पाल, डाॅ. आशुतोष पांडेय, डाॅ. अंशुमान पाठक, डाॅ. राकेश कुमार, डाॅ. कपिलदेव चौरसिया व डाॅ. प्रवीण राय मौजूद रहे।
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