फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राम मंदिर चढ़ावा चोरी: महिपाल की गवाही से खुल सकते हैं कई राज, 36,039 पन्नों के आरोप पत्र हुए हैं दाखिल

Sun, 27 Sep 2026 12:09 PM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या

सार

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में महिपाल की गवाही से कई राज खुल सकते हैं। मामले में 36,039 पन्नों के आरोप पत्र एसआईटी ने दाखिल किए हैं। चंपत राय के बयान पर भी विशेष नजर रहेगी। आगे पढ़ें पूरी खबर...
विज्ञापन
राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोप पत्र दाखिल। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में 36,039 पन्नों के आरोप पत्र और 133 गवाहों की सूची दाखिल होने के बाद अब गवाहों की गवाही मुकदमे की अहम कड़ी होगी। इनमें ट्रस्ट के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह और तत्कालीन महासचिव चंपत राय के बयान पर विशेष नजर रहेगी। दोनों मामले के अलग-अलग चरणों से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों के गवाह हैं।

विज्ञापन


महिपाल सिंह जनवरी 2021 से मई 2022 तक ट्रस्ट के लेखा प्रभारी रहे थे। चढ़ावे की गणना और लेखा व्यवस्था से जुड़े होने के कारण उन्हें नकदी समेत अन्य चढ़ावे के प्रबंधन की जानकारी थी। उन्होंने चढ़ावे में अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाने और ट्रस्ट पदाधिकारियों को इसकी जानकारी देने का दावा किया था। सितंबर में नई एसआईटी ने वीडियो कॉल के जरिये उनका क्रमवार बयान दर्ज किया था।

नकदी, सोना-चांदी और विदेशी मुद्रा पर उठाए थे सवाल

महिपाल ने नकदी, सोना-चांदी और विदेशी मुद्रा से जुड़ी अनियमितताओं पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने तत्कालीन महासचिव चंपत राय समेत ट्रस्ट पदाधिकारियों को शिकायत देने की बात कही थी। अदालत में उनकी गवाही से यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि उन्होंने क्या देखा, किसे और कब सूचना दी तथा शिकायत के बाद क्या कार्रवाई हुई। हालांकि किसी बयान में नाम आने मात्र से किसी व्यक्ति का अपराध सिद्ध नहीं होता। अभियोजन को कथनों की पुष्टि स्वतंत्र साक्ष्यों और दस्तावेजों से करनी होगी।

पहली सूचना से कार्रवाई तक का रिकॉर्ड बताएगी चंपत की गवाही

पूर्व महासचिव चंपत राय मामले में आरोपी नहीं, बल्कि अभियोजन पक्ष के गवाह हैं। आरोपपत्र में उनके खिलाफ आपराधिक संस्तुति नहीं की गई है। उनकी गवाही चोरी की घटना की पहली सूचना और उसके बाद ट्रस्ट स्तर पर हुई कार्रवाई से जुड़ी है। आरोपपत्र के अनुसार चार जून को गणना कर्मियों ने उन्हें चोरी से संबंधित वीडियो और संदेश भेजे थे। अगले दिन कारसेवकपुरम स्थित उनके आवास पर डॉ. अनिल मिश्र, गोपाल राव समेत अन्य लोग पहुंचे और वीडियो देखे गए।

डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव के बयान भी महत्वपूर्ण

डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव भी आरोपपत्र में गवाह हैं। दोनों ट्रस्ट की व्यवस्थाओं से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं। उनकी गवाही से चढ़ावा गणना की आंतरिक व्यवस्था, सुरक्षा और निगरानी, घटना की जानकारी मिलने तथा उसके बाद हुई कार्रवाई से जुड़े तथ्य सामने आ सकते हैं। 

गवाहों के बयान आरोप पत्र में दर्ज सीसीटीवी फुटेज, बरामदगी, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, दस्तावेजों और अन्य गवाहों के बयानों से किस हद तक मेल खाते हैं, यह मुकदमे में महत्वपूर्ण होगा। अंतिम निष्कर्ष अदालत साक्ष्यों और जिरह के आधार पर तय करेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें