33-पुलिस लाइन में आयोजित सेपक टकरा की प्रतियोगिता के बाद मौजूद प्रतिभागी खिलाड़ी।-संवाद
अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि परिसर स्थित वाल्मीकि मंदिर में पहली बार महर्षि वाल्मीकि जयंती मनाई गई। श्रीराम कथा के आदि कवि और संस्कृत महाकाव्य रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि की जयंती पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, दीप प्रज्ज्वलन और रामकथा पाठ का आयोजन हुआ।
सुबह वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच पुजारियों ने वाल्मीकि प्रतिमा का अभिषेक किया। पुष्प और नैवेद्य अर्पित कर ऋषि परंपरा को नमन किया। इस दौरान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि अयोध्या की आत्मा केवल श्रीराम ही नहीं, बल्कि उन महर्षियों में भी बसती है, जिन्होंने रामकथा को अमर बनाया। राम मंदिर परिसर के प्रत्येक उप मंदिर में अब वहां स्थापित देवता या ऋषि से जुड़े उत्सव नियमित रूप से मनाए जाएंगे।
वाल्मीकि मंदिर में यह पहला अवसर रहा, जब बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने एक साथ आरती की और भजन संध्या में भाग लिया। इस दौरान मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव भी मौजूद रहे। इसी कड़ी में बंगलूरू से आए मुनिराज सहित 130 साधकों ने श्रीराम जन्मभूमि परिसर (यज्ञशाला) में विष्णु सहस्त्रनाम परायण पाठ के बाद हवन और आरती करके दोपहर 1:30 बजे श्रीरामलला के दर्शन किए। इस दौरान गोपाल राव, डॉ. चंद्र गोपाल पांडेय व शैलेंद्र शुक्ल मौजूद रहे।